यू.पी. का शहर राजनगर। गरीब लड़के को पैसा चाहिए ताकि वह अमीर लड़की से शादी कर सके। अपने दो दोस्तों के साथ मिल कर वह एक ट्रक लूटता है। सोचता है कि डिब्बों में निकलेंगे मोबाइल फोन। लेकिन निकलते हैं ‘हेलमैट’ यानी कंडोम। अब ये बेचारे क्या करें? ये लोग इन ‘हेलमैट’ को ही बेचने निकल पड़े। खूब पैसा भी कमाया, मगर...!
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Monday, 6 September 2021
Friday, 29 March 2019
रिव्यू-ओस में भीगी ‘नोटबुक’
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
इंसानी भावनाओं की कहानियां धरती के किसी भी कोने में किसी भी ज़ुबान में कही जाएं, इंसानी मन को एक जैसी ही लगती हैं। 2014 में थाईलैंड
में बनी फिल्म ‘टीचर्स डायरी’ के इस रीमेक को देख कर
यही लगता है। श्रीनगर से दूर वूलर झील के बीच एक हाऊसबोट पर अपने मरहूम पिता के शुरू
किए स्कूल में मास्टर बन कर पहुंचे कबीर को उससे पहले वहां पढ़ा रही टीचर फिरदौस की
डायरी मिलती है। उसे पढ़ते-पढ़ते वह फिरदौस को जानने लगता है, महसूस करने लगता है, उससे प्यार तक करने लगता है। अगले साल वह चला जाता है और फिरदौस लौट आती है। उसी
डायरी में लिखी कबीर की बातों से वह भी उससे प्यार करने लगती है। अंत में इन दोनों
का मिलन होता है या नहीं, यह फिल्म में ही देखें
तो बेहतर होगा।
इंसानी भावनाओं की कहानियां धरती के किसी भी कोने में किसी भी ज़ुबान में कही जाएं, इंसानी मन को एक जैसी ही लगती हैं। 2014 में थाईलैंड
में बनी फिल्म ‘टीचर्स डायरी’ के इस रीमेक को देख कर
यही लगता है। श्रीनगर से दूर वूलर झील के बीच एक हाऊसबोट पर अपने मरहूम पिता के शुरू
किए स्कूल में मास्टर बन कर पहुंचे कबीर को उससे पहले वहां पढ़ा रही टीचर फिरदौस की
डायरी मिलती है। उसे पढ़ते-पढ़ते वह फिरदौस को जानने लगता है, महसूस करने लगता है, उससे प्यार तक करने लगता है। अगले साल वह चला जाता है और फिरदौस लौट आती है। उसी
डायरी में लिखी कबीर की बातों से वह भी उससे प्यार करने लगती है। अंत में इन दोनों
का मिलन होता है या नहीं, यह फिल्म में ही देखें
तो बेहतर होगा।
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