यू.पी. का शहर राजनगर। गरीब लड़के को पैसा चाहिए ताकि वह अमीर लड़की से शादी कर सके। अपने दो दोस्तों के साथ मिल कर वह एक ट्रक लूटता है। सोचता है कि डिब्बों में निकलेंगे मोबाइल फोन। लेकिन निकलते हैं ‘हेलमैट’ यानी कंडोम। अब ये बेचारे क्या करें? ये लोग इन ‘हेलमैट’ को ही बेचने निकल पड़े। खूब पैसा भी कमाया, मगर...!
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Monday, 6 September 2021
Saturday, 27 June 2020
रिव्यू-धीमे-धीमे कदम बढ़ाती ‘भोंसले’
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
मुंबई शहर। गणपति उत्सव के लिए मूर्तियां सज रही हैं। दूसरी तरफ पुलिस कांस्टेबल
गणपत भोंसले रिटायर हो रहा है। वह अकेला है, नितांत अकेला। जिस सस्ती-सी, पुरानी चाल में वह रहता
है वहां बसे मराठियों को लगता है कि मुंबई सिर्फ उनकी है और यू.पी.-बिहार से आए ये ‘भैये लोग’ जबरन यहां घुसे चले आ रहे हैं।
टैक्सी-ड्राईवर विलास अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए भोंसले भाऊ को ‘अपनी तरफ’ खींचना चाहता है। उधर उत्तर भारतीय
संघ वाले भी डटे हुए हैं। लेकिन भोंसले पर अपने आसपास की हरकतों का कोई खास असर नहीं
होता। मगर एक दिन कुछ ऐसा होता है कि वह कदम उठाने को मजबूर हो जाता है।Sunday, 28 July 2019
रिव्यू-अर्जुन ‘लिटल-लिटल’ पटियाला
-दीपक दुआ...(Featured in IMDb Critics Reviews)
इस फिल्म में पांच गाने हैं, हीरो-हीरोइन का रोमांस है, कॉमेडी है, पांच विलेन हैं (जो अंताक्षरी खेलने के लिए तो नहीं रखे गए हैं) यानी एक्शन भी है, इमोशन भी है, सोशल मैसेज भी है, और हां, सनी (पा जी नहीं) लियोनी भी है। अब एक हिन्दी फिल्म में आपको और क्या चाहिए?
इस फिल्म में पांच गाने हैं, हीरो-हीरोइन का रोमांस है, कॉमेडी है, पांच विलेन हैं (जो अंताक्षरी खेलने के लिए तो नहीं रखे गए हैं) यानी एक्शन भी है, इमोशन भी है, सोशल मैसेज भी है, और हां, सनी (पा जी नहीं) लियोनी भी है। अब एक हिन्दी फिल्म में आपको और क्या चाहिए?
Sunday, 2 September 2018
रिव्यू-सामाजिक सलवटों को इस्त्री करती ‘स्त्री’
साल में चार दिन उस कस्बे में पूजा होती है। इन्हीं चार दिनों में आती है एक भूतनी। जिस घर के बाहर ‘ओ स्त्री कल आना’ लिखा होता है,
उसमें नहीं जाती। वरना रातों को मर्द उठा कर ले जाती है वह। सिर्फ मर्द, उनके कपड़े नहीं। कहते हैं कि ये भूतनी मर्दों की प्यासी है। जो उसकी आवाज़ पर पलटा,
वह गायब। इसी कस्बे के तीन दोस्तों में से एक से पूजा के दिनों में मिलती है एक अनजान लड़की। न कोई नाम,
न नंबर। अचानक आती है,
अचानक गायब हो जाती है। कहीं यह लड़की ही वह ‘स्त्री’ तो नहीं...?
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