-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक सीन देखिए-पाकिस्तानी आर्मी अफसर की बीवी बन कर भारत से गई लड़की वहां रह कर भारत के लिए जासूसी करती है। वहां के लोगों से घुलने-मिलने के लिए वह आर्मी स्कूल के बच्चों को गाना सिखाती है। एनुअल डे पर बच्चे गा रहे हैं-‘ऐ
वतन, वतन मेरे, आबाद
रहे तू... मैं जहां रहूं, जहां
में याद रहे तू...।’ उन
बच्चों, वहां मौजूद आर्मी अफसरों, उनके
परिवार वालों के चेहरों पर अपने मुल्क पाकिस्तान के प्रति गर्वीली चमक है। लेकिन ठीक उसी वक्त, ठीक
वही चमक, अपने
मुल्क भारत के प्रति वहां खड़ी उस लड़की के चेहरे पर भी है। और यहीं हमें पता चलता है कि क्यों आलिया भट्ट हमारे समय में मौजूद एक बेहतर अदाकारा हैं और कैसे वह खुद को डायरेक्टर के हाथों में सौंप कर खुद उस किरदार में तब्दील हो जाती हैं।
एक सीन देखिए-पाकिस्तानी आर्मी अफसर की बीवी बन कर भारत से गई लड़की वहां रह कर भारत के लिए जासूसी करती है। वहां के लोगों से घुलने-मिलने के लिए वह आर्मी स्कूल के बच्चों को गाना सिखाती है। एनुअल डे पर बच्चे गा रहे हैं-‘ऐ
वतन, वतन मेरे, आबाद
रहे तू... मैं जहां रहूं, जहां
में याद रहे तू...।’ उन
बच्चों, वहां मौजूद आर्मी अफसरों, उनके
परिवार वालों के चेहरों पर अपने मुल्क पाकिस्तान के प्रति गर्वीली चमक है। लेकिन ठीक उसी वक्त, ठीक
वही चमक, अपने
मुल्क भारत के प्रति वहां खड़ी उस लड़की के चेहरे पर भी है। और यहीं हमें पता चलता है कि क्यों आलिया भट्ट हमारे समय में मौजूद एक बेहतर अदाकारा हैं और कैसे वह खुद को डायरेक्टर के हाथों में सौंप कर खुद उस किरदार में तब्दील हो जाती हैं।