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Sunday, 5 April 2020

रिव्यू-जूझने पर मजबूर करती ‘राक्खोश’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक पागलखाना। वहां बंद सैंकड़ों पागल। उनकी पागलों वाली हरकतें। स्टाफ का अजीबोगरीब व्यवहार। हर रोज़ वहां से गायब होता कोई पागल। साज़िश या संयोग? इसकी तफ्तीश करते कुछ लोग। क्या वहां कुछ गोलमाल चल रहा है या फिर सचमुच कोई राक्खोश (राक्षस) आकर किसी को शू..कर देता है?

Thursday, 21 March 2019

रिव्यू-निश्चय कर जीतने की कहानी कहती ‘केसरी’

-दीपक दुआ...  (Featured in IMDb Critic Reviews)
सारागढ़ी के किले में जब ब्रिटिश फौज के 21 सिक्ख सिपाहियों को दस हज़ार से ज़्यादा अफगान कबायलियों ने घेर लिया तो उन्होंने झुकने या भागने की बजाय लड़ने का रास्ता चुना। लड़े भी तो, अंग्रेज़ी फौज के लिए, किले के लिए, अपने लिए बल्कि दुनिया को यह बताने के लिए कि हम भले ही गुलाम जिए लेकिन मरे तो आज़ाद मरे, अपनी मर्ज़ी से मरे, वीरों की मौत मरे।

Friday, 21 September 2018

रिव्यू-इस ‘मंटो’ को समझने के लिए उस मंटो को समझना होगा

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अगर आप मेरे अफसानों को बर्दाश्त नहीं कर सकते... तो इसका मतलब यह है कि ज़माना ही नाकाबिले बर्दाश्त है...

इतनी बेबाकी, ठसक और शिद्दत के साथ सआदत हसन मंटो नाम के जिस शख्स ने उम्र भर अपनी बात कही, वह उम्र भर किस संघर्ष से होकर गुजरता रहा और अपने आखिरी दौर में वह किस कदर मजबूर था, यह भला कौन जानता है? और अगर इन संघर्षों और मजबूरियों से उसका साबका हुआ होता तो क्या यह मुमकिन नहीं कि वह सिर्फ 42 की उम्र में दुनिया छोड़ता...?

Friday, 11 May 2018

रिव्यू-खुरपेंच राहों पर ‘राज़ी’ सफर

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक सीन देखिए-पाकिस्तानी आर्मी अफसर की बीवी बन कर भारत से गई लड़की वहां रह कर भारत के लिए जासूसी करती है। वहां के लोगों से घुलने-मिलने के लिए वह आर्मी स्कूल के बच्चों को गाना सिखाती है। एनुअल डे पर बच्चे गा रहे हैं- वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू... मैं जहां रहूं, जहां में याद रहे तू...उन बच्चों, वहां मौजूद आर्मी अफसरों, उनके परिवार वालों के चेहरों पर अपने मुल्क पाकिस्तान के प्रति गर्वीली चमक है। लेकिन ठीक उसी वक्त, ठीक वही चमक, अपने मुल्क भारत के प्रति वहां खड़ी उस लड़की के चेहरे पर भी है। और यहीं हमें पता चलता है कि क्यों आलिया भट्ट हमारे समय में मौजूद एक बेहतर अदाकारा हैं और कैसे वह खुद को डायरेक्टर के हाथों में सौंप कर खुद उस किरदार में तब्दील हो जाती हैं।