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Saturday, 14 December 2019

रिव्यू-कड़वे हालात दिखाती है ‘मर्दानी 2’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
आपके दोस्त का एक्सीडैंट हो गया है। आप कहें तो मैं आपको हॉस्पिटल तक छोड़ दूं...? और फिर मिलती है उस लड़की की लाश-बुरी तरह से मसली हुई, कुचली हुई।

अपने मौजूदा समाज की यह कड़वी और स्याह तस्वीर है जिसमें दूसरों पर भरोसा करने वाली लड़कियां का सिर्फ भरोसा ही नहीं टूटता, उनका ज़मीर, इज़्ज़त, शरीर, वजूद, सब कुचला जाता है उस मर्द जातद्वारा जिसे गुरूर है अपने श्रेष्ठ होने पर। जिसे यकीन है कि वह औरतों से कहीं बेहतर है, खासतौर से उन औरतों से जिनके पास अपना दिमाग है, अपनी आवाज़ है, जो स्मार्ट हैं, या होना चाहती हैं। ऐसी औरतें, चाहें घरों में हों, दफ्तरों में, सड़कों पर या सोसायटी में, ये श्रेष्ठमर्द मौका मिलते ही उसे दबा देना चाहते हैं, चुप करा देना चाहते हैं, खत्म कर देना चाहते हैं।

Friday, 23 March 2018

रिव्यू-च्च...च्च...‘हिचकी’, वाह...वाह...‘हिचकी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक नामी स्कूल। होशियार बच्चे। काबिल टीचर। कुछ बच्चे नालायक। वे पढ़ना चाहते हैं उन्हें कोई पढ़ाना चाहता है। एक नया टीचर आता है। बाकियों से अलग। पढ़ाने का ढंग भी जुदा। नालायक बच्चे उसे भगाने की साज़िशें करते हैं। लेकिन वह डटा रहता है, टिक जाता है और उन्हीं नालायक बच्चों को होशियार बना देता है।