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Friday, 23 March 2018

रिव्यू-च्च...च्च...‘हिचकी’, वाह...वाह...‘हिचकी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक नामी स्कूल। होशियार बच्चे। काबिल टीचर। कुछ बच्चे नालायक। वे पढ़ना चाहते हैं उन्हें कोई पढ़ाना चाहता है। एक नया टीचर आता है। बाकियों से अलग। पढ़ाने का ढंग भी जुदा। नालायक बच्चे उसे भगाने की साज़िशें करते हैं। लेकिन वह डटा रहता है, टिक जाता है और उन्हीं नालायक बच्चों को होशियार बना देता है।