-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सरकार यानी सुभाष नागरे अब करीब 75 साल के हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में अभी भी उनका सिक्का चलता है। बिजनेसमैन गांधी अपने एक प्रोजेक्ट में उनकी मदद चाहता है लेकिन सरकार मना कर देते हैं। यहां से इनकी दुश्मनी शुरू होती है जिसमें दोनों तरफ साजिशें होती हैं, छल-कपट के खेल खेले जाते हैं, निष्ठाएं पलटती हैं, हत्याएं होती हैं और जाहिर है, चौथे पार्ट के बनने की संभावनाओं के साथ फिल्म खत्म होती है।
सरकार यानी सुभाष नागरे अब करीब 75 साल के हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में अभी भी उनका सिक्का चलता है। बिजनेसमैन गांधी अपने एक प्रोजेक्ट में उनकी मदद चाहता है लेकिन सरकार मना कर देते हैं। यहां से इनकी दुश्मनी शुरू होती है जिसमें दोनों तरफ साजिशें होती हैं, छल-कपट के खेल खेले जाते हैं, निष्ठाएं पलटती हैं, हत्याएं होती हैं और जाहिर है, चौथे पार्ट के बनने की संभावनाओं के साथ फिल्म खत्म होती है।