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Saturday, 19 September 2020

वेब रिव्यू-नेक इरादे के साथ मनोरंजन का वादा पूरा करती ‘अवरोध’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पिछले बरस ‘उरी’ के अपने रिव्यू में मैंने लिखा था कि ऐसी फिल्में ज़रूरी हैं ताकि लोगों को सनद रहे कि देश के भीतर बैठ कर नारे बनाना, सुनना और बोलना अलग बात है और सरहद पर जाकर उन नारों पर अमल करना दूसरी। उस फिल्म में 2016 में जम्मू-कश्मीर के उरी में आर्मी कैंप में घुस आए आतंकियों द्वारा 19 जवानों के मारे जाने के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुस कर आतंकियों के अड्डों को तबाह करने की सर्जिकल स्ट्राइक दिखाई गई थी। सोनी लिव पर मौजूद यह वेब-सीरिज़अवरोध- सीज विद् इनउसी सर्जिकल स्ट्राइक के लिए की गई घेरेबंदी को ज़रा और विस्तार से, ज़रा और करीब से, ज़रा और गहराई से, ज़रा और यथार्थपूर्ण तरीके से दिखाती है।

Monday, 3 August 2020

रिव्यू-अमेज़िंग ‘शकुंतला देवी’ की नॉर्मल कहानी

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पांच साल की एक बच्ची चुटकियों में गणित की मुश्किल से मुश्किल गणनाएं कर देती है। कभी स्कूल तक नहीं गई इस बच्ची ने देश-विदेश में अपनेमैथ्स शोज़के ज़रिए भरपूर नाम, शोहरत, पैसा कमाया। कम्प्यूटर से भी तेज़ कैलकुलेशन करने के कारण उसेह्यूमैन कम्प्यूटरतक कहा गया।गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्डमें उसका नाम भी आया। वह महान गणितज्ञ कहलाई, मशहूर ज्योतिषी बनीं, इंदिरा गांधी के विरुद्ध चुनाव में उतरी। उसने गणित, ज्योतिष, समलैंगिकता पर किताबें लिखीं, कई उपन्यास लिखे। उसी की ज़िंदगी पर बनी है यह फिल्म। कहिए है वह एक अमेज़िंग हस्ती...! काश, कि यह फिल्म भी उतनी ही अमेज़िंग हो पाती।

Saturday, 6 July 2019

ओल्ड रिव्यू-सलमान का धोबी पछाड़-‘सुल्तान’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सामने पर्दे पर सलमान खान हों तो आप फिल्म में क्या देखना चाहेंगे?
अगर आप सलमान खान के फैन हैं तो इस सवाल का सिर्फ एक ही जवाब हो सकता है-सलमान खान।
तो बस खुश हो जाइए, यह फिल्म आपके लिए ही है।

अब रही बात उनकी जो किसी फिल्म को उस फिल्म के लिए देखते हैं और आंख मूंद कर यूं ही किसी के फैन नहीं हो जाते। तो सुनिए, यह खेल पर आधारित फिल्म नहीं है। हां इसमें कुश्ती है, फिल्म के नायक और नायिका पहलवान हैं और कुश्ती करना, जीतना, मैडल लाना ही उनका सपना है। बावजूद इसके इस फिल्म को एक स्पोर्ट्स-फिल्म नहीं कह सकते। मुख्यतः यह एक लव-स्टोरी है जिसमें छिछोरा नायक पहलवान नायिका को प्रभावित करने के फेर में पहलवानी करने लगता है और फिर उसके हाथों बेइज्जत होकर इसी काम को सीरियसली ले लेता है। फिर कुछ ऐसा होता है कि वह पहलवानी छोड़ देता है। इसके बाद वह लौटता है तो किसी और को नहीं बल्कि अपने-आप को जीतने के लिए।

Friday, 17 August 2018

रिव्यू-फीकी चमक वाला ‘गोल्ड’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
1936 के बर्लिन ओलंपिक में गुलाम भारत यानी ब्रिटिश इंडिया की हॉकी टीम ने गोल्ड मैडल तो जीता लेकिन स्टेडियम में ब्रिटेन का राष्ट्रगान बज रहा था। देश आज़ाद हुआ तो उसी टीम के जूनियर मैनेजर ने सपना देखा कि 1948 के लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम दो सौ साल की गुलामीके बाद जीते और अपने जन गण मन...की धुन पर गोल्ड लेकर आए। और बस, वो जुट गया तमाम बाधाओं के बीच एक जानदार टीम तैयार करने में जो एक शानदार जीत हासिल कर सके।

यह सही है कि 1948 में भारतीय टीम ने लंदन ओलंपिक में ब्रिटेन को उसी के घर में 4-0 से हरा कर गोल्ड जीता था। लेकिन इतिहास यह नहीं बताता कि वो सपना किसी टीम-मैनेजर का था। लेकिन यह फिल्म है जनाब, जो इतिहास के कुछ सच्चे किस्सों में ढेर सारी कल्पनाएं मिला कर आपको देशप्रेम की ऐसी चाशनी चटाती है कि आप बिना कुछ आगा-पीछा सोचे बस, उसे चाटते चले जाते हैं।