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Saturday, 22 February 2020

रिव्यू-शुभ मंगल ज़्यादा मज़ेदार

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बंद कमरे में अमन अपने माता-पिता को बताता है कि वह गे’ (समलैंगिक) है और कार्तिक से प्यार करता है। मां कहती है-तू चिंता मत कर, हम तेरा इलाज करवाएंगे और तू बिल्कुल ठीक हो जाएगा।अमन कहता है-वाह मम्मी, आपका ऑक्सीटोसिन प्यार और मेरा बीमारी...!

यही तो होता है हमारे समाज में कि जिस किसी ने भी समाज की रिवायतों के बंधे-बंधाए ढर्रे से हट कर चलना चाहा उसे बीमारमान लिया गया जबकि सच यह है कि इंसान समलैंगिक बनता नहीं है, होता है। ठीक वैसे, जैसे यह फिल्म कहती है कि अमिताभ बच्चन बना नहीं जाता, वो तो होता है।