छत्तीसगढ़ का एक छोटा-सा शहर। यहां हर कोई हर किसी को जानता है। लेकिन बिल्लू यानी प्रेम कुमार यादव को अपनी खुद की पहचान बनानी है। सो,
पिता की तरह जंगल विभाग की चपरासीगिरी न करके वह शहर से बाहर वाली सड़क पर पान का खोखा लगा लेता है। सड़क वीरान है और बिल्लू का धंधा भी। पर तभी सामने वाले इकलौते घर में रहने आए इंजीनियर साहब की जवान होती लड़की के चक्कर में शहर भर के लौंडे-लपाड़ों की भीड़ वहां लगने लगती है। बिल्लू का धंधा चमकने लगता है और उसके अरमान भी। पहचान तो खैर, उसकी बन ही जाती है।
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Wednesday, 15 July 2020
रिव्यू-छोटे शहर की लवली-सी कहानी ‘चमन बहार’
छत्तीसगढ़ का एक छोटा-सा शहर। यहां हर कोई हर किसी को जानता है। लेकिन बिल्लू यानी प्रेम कुमार यादव को अपनी खुद की पहचान बनानी है। सो,
पिता की तरह जंगल विभाग की चपरासीगिरी न करके वह शहर से बाहर वाली सड़क पर पान का खोखा लगा लेता है। सड़क वीरान है और बिल्लू का धंधा भी। पर तभी सामने वाले इकलौते घर में रहने आए इंजीनियर साहब की जवान होती लड़की के चक्कर में शहर भर के लौंडे-लपाड़ों की भीड़ वहां लगने लगती है। बिल्लू का धंधा चमकने लगता है और उसके अरमान भी। पहचान तो खैर, उसकी बन ही जाती है।Saturday, 22 February 2020
रिव्यू-शुभ मंगल ज़्यादा मज़ेदार
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बंद कमरे में अमन अपने माता-पिता को बताता है कि वह ‘गे’ (समलैंगिक) है और कार्तिक से प्यार करता है। मां कहती है-‘तू चिंता मत कर, हम तेरा इलाज करवाएंगे और तू बिल्कुल ठीक हो जाएगा।’
अमन कहता है-वाह मम्मी, आपका ऑक्सीटोसिन प्यार और मेरा बीमारी...!
बंद कमरे में अमन अपने माता-पिता को बताता है कि वह ‘गे’ (समलैंगिक) है और कार्तिक से प्यार करता है। मां कहती है-‘तू चिंता मत कर, हम तेरा इलाज करवाएंगे और तू बिल्कुल ठीक हो जाएगा।’
अमन कहता है-वाह मम्मी, आपका ऑक्सीटोसिन प्यार और मेरा बीमारी...!
यही तो होता है हमारे समाज में कि जिस किसी ने भी समाज की रिवायतों के बंधे-बंधाए ढर्रे से हट कर चलना चाहा उसे ‘बीमार’ मान लिया गया जबकि सच यह है कि इंसान समलैंगिक बनता नहीं है, होता है। ठीक वैसे, जैसे यह फिल्म कहती है कि अमिताभ बच्चन बना नहीं जाता, वो तो होता है।
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