-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
खालिस मसाला फिल्मों का जमाना गया। अब तो मसाले के साथ मैसेज परोसने का दौर है। यह फिल्म (बद्रीनाथ की दुल्हनिया) भी यही कर रही है। दहेज के खिलाफ लंबा-चैड़ा डिस्क्लेमर देती है, नारी-मुक्ति की बात करती है, लड़कियों को सपने देखने और उड़ान भरने को कहती है, साथ ही मनोरंजन भी करती है। मगर अफसोस, यह सब छोटे-छोटे टुकड़ों में है और ये टुकड़े ज्यादा दमदार भी नहीं हैं।
खालिस मसाला फिल्मों का जमाना गया। अब तो मसाले के साथ मैसेज परोसने का दौर है। यह फिल्म (बद्रीनाथ की दुल्हनिया) भी यही कर रही है। दहेज के खिलाफ लंबा-चैड़ा डिस्क्लेमर देती है, नारी-मुक्ति की बात करती है, लड़कियों को सपने देखने और उड़ान भरने को कहती है, साथ ही मनोरंजन भी करती है। मगर अफसोस, यह सब छोटे-छोटे टुकड़ों में है और ये टुकड़े ज्यादा दमदार भी नहीं हैं।