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Sunday, 10 January 2021

गोआ में होगी इन 15 फिल्मों की टक्कर

-दीपक दुआ... 
हर साल नवंबर के महीने में गोआ में आयोजित किए जाने वाले भारत के सबसे बड़े फिल्मी मेलेभारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहयानी इफ्फी पर भी कोरोना की मार पड़ी और पिछले साल की बजाय यह समारोह अब 16 से 24 जनवरी तक होने जा रहा है। इस समारोह का एक बड़ा आकर्षण रहता है इसका प्रतियोगिता खंड जिसमें दुनिया की चुनिंदा बेहतरीन फिल्में आकर आपस में टकराती हैं और एक ख्यात जूरी इन्हें 90 लाख रुपए के पांच पुरस्कार देती है। इस साल 15 फिल्में इस खंड में शामिल की गई हैं।

Tuesday, 7 July 2020

‘गर्म हवा’ वाले एम.एस. सत्यु ने मुझे जो खत लिखा

-दीपक दुआ...
अपने पिछले आलेख में मैंनेगर्म हवाजैसी कालजयी फिल्म बनाने वाले एम.एस. सत्यु के उस खत का ज़िक्र किया था जो उन्होंने मेरे खत के जवाब में मुझे लिखा था और उसके करीब 17 साल बाद गोआ में मैंने उन्हें इसके लिए शुक्रिया कहा था। (वह आलेख यहां क्लिक करके पढ़ें)

दरअसल वह पत्र मैंने सत्यु साहब को अपने पत्रकारिता के कोर्स के प्रोजेक्ट के सिलसिले में एक प्रश्नावली की शक्ल में भेजा था जिसमें मैंनेकला सिनेमाऔरव्यावसाहिक सिनेमाके वर्गीकरण, सिनेमा में आते बदलाव, उन्हें मिलते सरकारी प्रश्रय, सिनेमा के भविष्य आदि पर सवाल पूछे थे और सत्यु साहब ने प्रश्नावली के हर सवाल का अलहदा जवाब देने की बजाय अपने खत में उन सारे बिंदुओं पर अपनी बात रखी थी। उस पत्र का हिन्दी अनुवाद यह रहा :-

Monday, 6 July 2020

जब मैंने एम.एस. सत्यु को किया 17 साल पुराना शुक्रिया

-दीपक दुआ...
एम.एस. सत्यु-‘गर्म हवावाले एम.एस. सत्यु। सिर्फ यही एक फिल्म काफी है उनका परिचय देने के लिए, उन्हें विश्व सिनेमा के इतिहास में अमरत्व प्रदान करने के लिए। वही मैसूर श्रीनिवास सत्यु आज 6 जुलाई को नब्बे के हो गए। उन्हीं से जुड़ा मेरा एक यादगार संस्मरण जब मैंने उनसे कहा था-‘सर आपको 17 साल पुराना एक शुक्रिया अदा करना है...!’

Sunday, 1 December 2019

इफ्फी-सुनहरे बरस में फिल्मोत्सव की धूम

-दीपक दुआ...
1952 में शुरू हुए भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) ने इस बरस अपने 50वें संस्करण में कदम
रखा। इस सुनहरे मौके पर इफ्फी की रंगत कुछ अलग ही रही। 20 नवंबर की शाम करण जौहर के संचालन और अमिताभ बच्चन रजनीकांत जैसे दो महानायकों की उपस्थिति में इस समारोह की रंगारंग शुरूआत हुई। देश-विदेश की ढेरों उत्कृष्ट फिल्मों के प्रदर्शन के साथ-साथ सिनेमा से जुड़ी बहुतेरी गतिविधियां से यह उत्सव लबरेज रहा।
बदला रंग बदला रूप
1952 से लेकर अब तक इफ्फी के रूप-रंग में कई किस्म के बदलाव हुए हैं। पहले यह महोत्सव घुमंतू था। हर साल देश के अलग-अलग शहरों में होता था। लेकिन 2004 से यह गोआ में जाकर जम चुका है और अपनी एक अलग पहचान भी हासिल कर चुका है। गोआ में भी यह पहले 23 नवंबर से 3 दिसंबर तक होता था। फिर यह 20 से 30 नवंबर तक होने लगा और 2016 से इसे 20 से 28 नवंबर तक आयोजित किया जाने लगा।