-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
चेतावनी : मसालेदार, चटपटी, बे-दिमाग
फिल्में देखने, पसंद करने
वाले ही आगे
पढ़ें। बाकी लोग
यहीं से पलट
लें वरना रपट
जाएंगे।
चेतावनी : मसालेदार, चटपटी, बे-दिमाग
फिल्में देखने, पसंद करने
वाले ही आगे
पढ़ें। बाकी लोग
यहीं से पलट
लें वरना रपट
जाएंगे।
मुंबई अंडरवर्ल्ड का
डॉन नारायण अन्ना।
उसके बेटे जैसा
हीरो रघु जो
उसके एक इशारे
पर जान ले-ले, दे-दे।
इस बात से
खफा उसका असली
बेटा विष्णु रघु
को दुश्मन मान
बैठा है। रघु
पर फिदा तवायफ
आरज़ू। लेकिन रघु
का दिल आया
कश्मीर से आई
ज़ोया पर। ज़ोया
उसे सुधारना चाहती
है। रघु-विष्णु
की भिड़ंत में
बेकसूर लोग मरने
लगे तो रघु
बागी हो उठा।
लेकिन अन्ना के
नमक ने उसे
रोक लिया। आखिर
एक दिन रघु
ने बुरे लोगों
को मार ही
डाला।