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Friday, 13 August 2021

रिव्यू-इस ‘भुज’ को देख कर प्राउड क्यों नहीं होता?

-दीपक दुआ...  (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
1971 में जब भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की मदद के लिए तैनात थी तो पाकिस्तान ने गुजरात और राजस्थान में कई जगह मोर्चे खोल दिए थे। भुज स्थित एयरबेस और हवाई पट्टी को तबाह कर दिया गया था। तब वहां के कमांडिंग अफसर विजय कार्णिक ने स्थानीय लोगों की मदद से तीन दिन में एक कामचलाऊ रनवे बना कर उस लड़ाई का पासा पलटने में मदद की थी। कुछ ही दूर एक मोर्चे पर हमारे 120 सैनिक पाकिस्तान के 1800 सैनिकों से जूझ रहे थे। उसी दौरान एकपगी’ (रेगिस्तान के जानकार व्यक्ति) रणछोड़ दास ने भी सेना की बहुत मदद की थी। उन्हीं दिनों पाकिस्तान के एक बड़े आर्मी अफसर से ब्याही भारत की एक जासूस भी काफी अहम खबरें मुहैया करा रही थी।
 
वाह, चार घटनाएं...! इन पर तो चार फिल्में बन जाएं। और अगर ये चारों आपको इस एक फिल्म में मिल जाएं तो...? बल्ले-बल्ले हो जाए...? पर काश कि ऐसा हुआ होता। काश कि ऐसा हो पाता। अफसोस...!

Monday, 26 July 2021

रिव्यू-‘हंगामा 2’ में है कचरा अनलिमिटेड

प्रियदर्शन जैसे काबिल निर्देशक, यूनुस सजावल जैसे हिट लेखक, वीनस जैसा बड़ा बैनर, मलयालम की एक सफल फिल्म का रीमेक, ऊपर सेहंगामाका ब्रांड-सब चंगा ही तो है। अब इस परहंगामा 2’ नाम से कोई फिल्म बनेगी तो वह भी चंगी ही होगी, लोगों का खूब मनोरंजन करेगी, लोग उस तरह से हंसते-हंसते पागल भी हो सकते हैं जैसे प्रियन सर की हीहेरा फेरी, ‘भागम भाग, ‘हंगामा, ‘हलचल, ‘चुप चुप के, ‘दे दना दनवगैरह के समय हुए थे। लेकिन क्या सचमुच ऐसा हुआ...? ऐसा है...? ऐसा होगा...? जवाब है-नहीं, नहीं, नहीं...!