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Thursday, 15 July 2021

ओल्ड रिव्यू-न ‘ग्रेट’ न ‘ग्रैंड’, बस हल्की ‘मस्ती’

अगर सैक्स कॉमेडी लोगों को पसंद आतीं तो रिलीज़ होने से हफ्ता भर पहले लीक हो कर यह फिल्म हर जवां मोबाइल फोन में घूम रही होती।
 
अगर लोग इस तरह की फिल्मों के दीवाने होते तो ये बनतीं और ही कामयाबी पातीं।
 
अब बात यह कि क्या यह फिल्म वह मस्ती, वह मनोरंजन, वह गुदगुदाहट पैदा कर पाई है जिसके लिएमस्तीसीरिज़ की फिल्में जानी जाती हैं?

Wednesday, 8 May 2019

रिव्यू-काश, थोड़ी और सैट होती ‘सैटर्स’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
अक्सर खबरों में दिखाई-सुनाई देता है कि फलां इम्तिहान में जम कर नकल चली, असली उम्मीदवार की जगह कोई और पेपर देता पकड़ा गया या पैसे लेकर सैटिंग हुई और पेपर पहले ही लीक हो गए। मन करता है यह जानने का कि आखिर वे कौन लोग हैं जो सैटिंग के इन कामों को अंजाम देते हैं? कैसे करते हैं ये लोग हर लेवल पर जाकर ऐसी सैटिंग कि किसी को पता भी नहीं चलता? या फिर पता तो सब को होता है लेकिन कोई सामने नहीं आता? तो क्या इस खेल में सिस्टम और उसकी मशीनरी भी शामिल होती है? अश्विनी चौधरी की यह फिल्म इन सारे सवालों के जवाब तलाशती है और खुल कर इस छुपे हुए खेल को दिखाती है जिसे करने वालों को सैटर्स कहा जाता है।