एक्शन और रोमांच से भरी एक ऐसी वेब-सीरिज़ जिसका मुख्य नायक एक सीक्रेट एजेंट हो और देश को बचाने के लिए जान हथेली पर लिए घूमता हो,
उस सीरिज़ का नाम ‘फैमिली मैन’...?
किसने सोचा होगा यह नाम?
और क्यों?
लेकिन इस सीरिज़ को देख चुके लोग जानते हैं कि श्रीकांत तिवारी नाम का यह नायक असल में कितना मजबूर फैमिली-मैन है जो एक तरफ अपने फर्ज़ और दूसरी तरफ अपनी फैमिली के प्रति ज़िम्मेदारियों के बीच इस कदर फंसा हुआ है कि उस पर तरस आता है। उसकी पत्नी उससे खुश नहीं है,
बेटी हाथ से निकली जा रही है,
लेकिन वह है कि देश और ड्यूटी के प्रति अपने जुनून में कमी नहीं आने देता। यह सीरिज़ दरअसल ऐसे ही जुनूनियों की कहानी है जो सामने न आकर हर दिन,
हर पल देश के लिए कहीं खड़े हैं,
किसी न किसी रूप में। एक जगह एजेंट जे.के. कहता भी है-‘करते नेता हैं और मरते हम हैं।’ तो श्रीकांत का जवाब होता है-‘हम किसी नेता के लिए नहीं,
उसके पद और उस पद की प्रतिष्ठा के लिए अपनी जान दांव पर लगाते हैं।’
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Thursday, 10 June 2021
वेब रिव्यू-रोमांच की आंच में तप कर निकला ‘फैमिली मैन 2’
Saturday, 26 August 2017
रिव्यू-थोड़ा सुशील थोड़ा रिस्की ‘जैंटलमैन’
-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
गौरव (सिद्धार्थ मल्होत्रा)। अमेरिका में अपना घर, गाड़ी, नौकरी और बगल में छोकरी (जैक्लिन फर्नांडीज) भी। लेकिन छोकरी की नजर में वह कुछ ज्यादा ही सुंदर और सुशील है, एकदम घरेलू किस्म का। उसे तो चाहिए कोई रिस्की बंदा।
गौरव (सिद्धार्थ मल्होत्रा)। अमेरिका में अपना घर, गाड़ी, नौकरी और बगल में छोकरी (जैक्लिन फर्नांडीज) भी। लेकिन छोकरी की नजर में वह कुछ ज्यादा ही सुंदर और सुशील है, एकदम घरेलू किस्म का। उसे तो चाहिए कोई रिस्की बंदा।
ऋषि (सिद्धार्थ मल्होत्रा)। एक खुफिया एजेंट। हर दम जान हथेली पर लेकर किसी न किसी मिशन पर रहता है। लेकिन वह इस रिस्की जिंदगी को छोड़ एक सुंदर, सुशील जीवन जीना चाहता है। आखिर क्या रिश्ता है गौरव और ऋषि का? कोई रिश्ता है भी?
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