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Wednesday, 23 October 2019

रिव्यू-बदलती हवा का रुख बतलाती ‘सांड की आंख’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पिछली सदी के आखिरी दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से गांव में साठ की उम्र पार कर चुकीं दो दादियों ने निशानेबाजी शुरू की और देखते ही देखते ढेरों राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले जीत कर पदकों का ढेर लगा दिया और दुनिया भर में शूटर-दादी के नाम से मशहूर हुईं। पर क्या इनका यह सफर इतना आसान रहा होगा? पूरी ज़िंदगी घूंघट के अंदर काटने और हर किसी की चाकरी करने के बाद समाज के पितृसत्तात्मक रवैये के सामने उठ खड़े होने की हिम्मत कहां से आई होगी इनके भीतर? कैसे इन्होंने उन तमाम बाधाओं को लांघा होगा जो इनकी राह में कभी पति, कभी बेटे, कभी समाज के तानों, कभी परंपराओं की बेड़ियों के रूप में सामने आई होंगी। यह फिल्म इनके इसी सफर को, इस सफर के दौरान किए गए संघर्ष को दिखाती है और बड़े ही कायदे से दिखाती है।

Saturday, 20 May 2017

रिव्यू-आधी सूखी आधी गीली ‘हाफ गर्लफ्रैंड’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इस फिल्म की नायिका को बारिश में भीगना अच्छा लगता है। दिल्ली के करोड़पति बाप की बेटी रिया सोमानी को अपने मां-बाप के बीच की कड़वाहट सुखा देती है और शायद इसीलिए वह खुद को बरसात में भिगो देना चाहती है। कॉलेज में साथ बास्केट-बॉल खेलने वाले बिहारी लड़के माधव झा से उसे अपनापन मिलता है तो वह खिलने-खुलने भी लगती है लेकिन जब माधव भी उससे वही मांगता है जो तकरीबन हर लड़का हर लड़की से चाहता है तो वह उसे झटक देती है। एक दिन वह गीला मन लिए चली जाती है तो इधर माधव बुझने-सूखने लगता है। बरसों बाद रिया लौटती है लेकिन इस बार हमेशा के लिए जाने के लिए।