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Sunday, 4 October 2020

रिव्यू-डॉली किट्टी के खोखले सितारे

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
दिल्ली से सटा नोएडा और उससे सटा ग्रेटर नोएडा। अपने परिवार संग रहती डॉली। बिहार से उसकी कज़िन किट्टी भी बसी उसके यहां। दोनों उड़ना चाहती हैं। अपनी अधूरी तमन्नाएं, दमित इच्छाएं पूरी करना चाहती हैं। करती भी हैं और नारीमुक्तहो जाती है।
 
राईटर-डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव अपनी फिल्मों के ज़रिएनारी मुक्तिका झंडा उठाए रहती हैं। अपनी पिछली फिल्मलिपस्टिक अंडर माई बुर्कामें भी वह यही कर रही थीं। चार औरतों की कहानी के बरअक्स उन्होंने उस फिल्म में भी नारी की अधूरी, दबी हुई इच्छाओं को दिखाने का प्रयास किया था। लेकिन तब भी और अब तो और ज़्यादा, वह अपने इस प्रयास में विफल रही हैं। और इसका कारण यह है कि अलंकृता अपने मन में यह छवि बिठा चुकी हैं कि नारी तभीमुक्तहो सकती है जब वह पुरुष की सब बुराइयां, सारी कमियां अपना ले। उस फिल्म के रिव्यू में मैंने यही लिखा था (यहां क्लिक करें) कि ‘‘ क्या फ्री-सैक्स, शराब-सिगरेट, फटी जींस और अंग्रेजी म्यूजिक अपनाने भर से औरतें आजाद हो जाएंगी? आजादी के ये प्रतीक क्या इसलिए, कि यही सब पुरुष करता है? अगर ऐसा है तो फिर औरत यहां भी तो मर्द की पिछलग्गू ही हुईं? फिल्मकारों को नारीमुक्ति की इस उथली और खोखली बहस से उठने की जरूरत है।’’

Friday, 21 February 2020

रिव्यू-डराने में कामयाब है यह ‘भूत’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
मुंबई के जुहू बीच पर जाने कहां से एक पुराना जहाज फंसा है। जहाज पर कोई नहीं है। शिपिंग कॉरपोरेशन के अफसर को जहाज की जांच में अहसास होता है कि यहां अजीबोगरीब हरकतें होती हैं। उसे लगता है कि यहां कोई है। कौन...? कोई भूत या फिर...! क्या यह हकीकत है या सिर्फ उसका वहम क्योंकि खुद उसे भी तो अक्सर अपनी मरी हुई बीवी और बेटी दिखाई देती रहती हैं। कैसे मुक्ति दिलाएगा वह इस भूतको और इस जहाज को? और क्या इसी में ही छुपी है खुद उसकी भी मुक्ति?

Sunday, 8 December 2019

रिव्यू-पति पत्नी और मसालेदार वो

रिव्यू-पति पत्नी और मसालेदार वो (Featured in IMDb Critics Reviews)
-दीपक दुआ...
1978 में आई बी.आर. चोपड़ा जैसे दिग्गज निर्देशक की फिल्म पति पत्नी और वोमें पति संजीव कुमार अपने ऑफिस की जवां सेक्रेटरी रंजीता से अपनी पत्नी विद्या सिन्हा की बीमारी का बहाना करके अफेयर चलाता है। उस फिल्म के इस रीमेक में कानपुर में सरकारी नौकरी कर रहा इंजीनियर कार्तिक आर्यन अपनी पत्नी भूमि पेढनेकर के किसी और के साथ अफेयर होने की बात कह कर अनन्या पांडेय की नजदीकियां हासिल करता है। एक कामयाब फिल्म का रीमेक बने और आज के दर्शकों की मसालेदार मनोरंजन पाने की चाहत को ध्यान में रख कर बने तो वह कामयाब होगी ही, क्लासिक भले ही न हो पाए। वैसे भी अब क्लासिक फिल्में किसे चाहिएं? जब दर्शक जंक-फूड से खुश हों तो फिल्म वाले भी क्यों ज़ोर लगाएं।

Wednesday, 23 October 2019

रिव्यू-बदलती हवा का रुख बतलाती ‘सांड की आंख’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पिछली सदी के आखिरी दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से गांव में साठ की उम्र पार कर चुकीं दो दादियों ने निशानेबाजी शुरू की और देखते ही देखते ढेरों राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले जीत कर पदकों का ढेर लगा दिया और दुनिया भर में शूटर-दादी के नाम से मशहूर हुईं। पर क्या इनका यह सफर इतना आसान रहा होगा? पूरी ज़िंदगी घूंघट के अंदर काटने और हर किसी की चाकरी करने के बाद समाज के पितृसत्तात्मक रवैये के सामने उठ खड़े होने की हिम्मत कहां से आई होगी इनके भीतर? कैसे इन्होंने उन तमाम बाधाओं को लांघा होगा जो इनकी राह में कभी पति, कभी बेटे, कभी समाज के तानों, कभी परंपराओं की बेड़ियों के रूप में सामने आई होंगी। यह फिल्म इनके इसी सफर को, इस सफर के दौरान किए गए संघर्ष को दिखाती है और बड़े ही कायदे से दिखाती है।