Wednesday, 10 August 2016

मुबारक बेगम-जीती रहीं अहसास-ए-कमतरी में

-दीपक दुआ...
बात तब की जब मैं ‘फिल्मी कलियां’ के लिए लिखा करता था। हमारे एक संगीत-रसिक पाठक अक्सर हमें संगीत-जगत से जुड़ी किसी हस्ती के बारे में आलेख भेजते थे और हम उन्हें छापा भी करते थे। इसी क्रम में एक बार उन्होंने मुबारक बेगम पर लेख भेजा। मुझे लगा कि इसे और वजनी बनाया जाए, सो मैंने उनसे फोन नंबर लेकर मुबारक बेगम से लंबी बातचीत की। उसके बाद मुबारक बेगम से कई बार फोन पर बातें हुईं। इच्छा तो यह भी थी कि मुंबई जाकर उनसे मिल कर कैमरे पर उन्हें रिकाॅर्ड किया जाए। कुछ फिल्मकार मित्रों को सुझाया भी कि उन पर डाॅक्यूमैंट्री बनाई जाए मगर कभी वक्त आड़े आया तो कभी किस्मत। खैर, यह संतुष्टि है कि मैंने जब-जब उनके बारे में कहीं लिखा तो किसी न किसी ने उनकी मदद भी की। लीजिए उनसे हुई बातें पढ़िए। आलेख थोड़ा लंबा है मगर है दिलचस्प।

Monday, 8 August 2016

बाॅक्स आॅफिस-जुलाई-सुलतान का रहा जलवा

पिछले कई साल से 'हरिभूमि' अखबार में हर महीने अपना कॉलम 'बॉक्स ऑफिस' आ रहा है. जुलाई के बॉक्स-ऑफिस की रिपोर्ट शनिवार 6 अगस्त को छपी, जिसे यहाँ पढ़ा जा सकता है-

जुलाई की शुरूआत हुई तो रमजान का महीना अपने आखिरी पड़ाव पर था। ऐसे में छोटे बजट की वे फिल्में आती हैं जिन्हें रिलीज होने का कोई और मौका न मिल रहा हो। सो, ‘शोरगुल’, ‘कैरी आॅन कुत्तों’, ‘हवस की इंतहा’ जैसी इन फिल्मों में ऐसा कुछ नहीं था कि इन्हें देखा या सराहा जाता। वैसे भी ईद पर ‘सुलतान’ के आने के कारण इन्हें थिएटरों में सिर्फ पांच दिन मिले और धेले भर कमाई।

ईद का मौका हो और सलमान खान की फिल्म हो तो उसके साथ चलने की हिम्मत कोई नहीं करता। जुलाई के दूसरे हफ्ते में आई भाई की ‘सुलतान’ को खुल कर खेलने के लिए ईद जैसा हाॅट मौका और नौ दिन मिले जिसका इस फिल्म को जम कर फायदा पहुंचा। पहले दो दिन में ही करीब 74 करोड़ की कलैक्शन लेने के बाद इस फिल्म ने नौ दिन में लगभग 229 करोड़ रुपए बटोर डाले और इस साल की अब तक की सबसे बड़ी हिट फिल्म होने का खिताब भी पाया। परिवार सहित देखे जाने लायक फिल्म होने का भी इसे काफी फायदा पहुंचा और दूसरे सप्ताह में इस फिल्म ने करीब 49 करोड़ की कलैक्शन की।

जुलाई का तीसरा शुक्रवार एडल्ट काॅमेडी ‘ग्रैट ग्रैंड मस्ती’ लेकर आया जो यूं तो 22 जुलाई को आनी थी लेकिन आॅनलाइन लीक होने के कारण इसके निर्माता इसे एक हफ्ता पहले यानी 15 जुलाई को ले आए। हालांकि इस किस्म की फिल्मों का भी एक दर्शक वर्ग है लेकिन उसे भी तो कुछ मसाले चाहिए होते हैं जबकि इस फिल्म में सिवाय फूहड़ता के और कुछ नहीं था। सो, आते ही इसकी पोल खुल गई और काफी कम दर्शकों ने ही इस पर पैसे लुटाने की हिम्मत दिखाई। पहले हफ्ते में महज साढ़े तेरह करोड़ की इसकी कलैक्शन इसे एक नाकाम फिल्म का दर्जा दिलवाती है। इसके साथ आई ‘एक हकीकत रंजिश’ का तो कहीं नाम भी सुनने में नहीं आया।

इरफान की ‘मदारी’ को तारीफें तो मिलीं लेकिन इसकी साधारण कहानी और लगभग सूखे ट्रीटमैंट के चलते ज्यादातर दर्शकों ने इससे दूरी बनाए रखी। इस किस्म की फिल्में जिस तरह का हार्डहिटिंग और पैना नजरिया मांगती हैं, वह इस फिल्म में देखने को नहीं मिला और इसे पहले सप्ताह में सिर्फ साढ़े बारह करोड़ की कलैक्शन से ही संतोष करना पड़ा। इसी सप्ताह आईं ‘इश्क क्लिक’ और ‘एम क्रीम’ के तो आने और जाने तक ही आहट नहीं हुई। रजनीकांत की डब फिल्म ‘कबाली’ ने जरूर टिकट-खिड़की पर गर्मी बनाए रखी। बाकी भाषाओं में तो इसने जम कर कमाई की मगर हिन्दी में एक हफ्ते की इसकी कलैक्शन करीब 22 करोड़ ही रही। रजनीकांत के जलवे को देखते हुए यह कम है तो वहीं एक डब फिल्म की हैसियत से काफी ज्यादा।

जुलाई जाते-जाते रोहित धवन की ‘ढिशुम’ देकर गया। एक बहुत ही कमजोर कहानी और काफी लचर पटकथा पर बनी इस फिल्म को सिर्फ मसालेदार मनोरंजन पसंद करने वाले दर्शकों ने ही कुछ हद तक पसंद किया। डेविड धवन के बेटे रोहित अपने पिता की ही तरह छिछोरेपन वाली फिल्में बनाते रहे तो भीड़ में गुम होकर रह जाएंगे।
-दीपक दुआ

Friday, 5 August 2016

फिल्म समीक्षा-‘बुधिया सिंह’ में है कुछ बात

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
करीब दस बरस पहले चार-पांच साल के बुधिया ने ओड़िशा में ढेरों मैराथन दौड़ कर दुनिया भर में नाम कमाया था। बेहद गरीब घर के इस बच्चे को एक अतिमहत्वाकांक्षी कोच बिरंची दास दुनिया के सामने लाया था लेकिन कैसे उसके इरादे, बुधिया के सपने और लोगों की उम्मीदें राजनीति का शिकार होकर गर्क हो गई थीं यह तब पता चलता है कि वही बुधिया आज एक असाधारण प्रतिभाशाली लड़के से एक आम किशोर में तब्दील हो चुका है। हालांकि वह अभी भी दौड़ना चाहता है लेकिन कोई उसे मदद नहीं कर रहा है।

रिव्यू-द ‘झंड’ ऑफ माइकल मिश्रा

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अरशद सर आपको एक फिल्म में लेना है, कहानी यह है कि...!
अरे छोड़ यार, पैसे कितने दोगे, यह बोलो...?
अदिति मैम, आप अरशद वारसी की हीरोइन होंगी, कहानी...!
छोड़िए भी, पैसे बताइए...!
बोमन सर, आपको और आपके बेटे को एक साथ लेंगे।
ओह गुड, डन। पैसे बोलो...!
प्रोड्यूसर जी, अरशद-अदिति-बोमन राजी हो गए हैं। कहानी सुन लीजिए...।
अरे छोड़ यार, पैसे बोल कितने लगेंगे...?

Tuesday, 2 August 2016

‘बुधिया सिंह’ में दिखेंगे गोपाल...



थिएटर और फिल्मों के जाने-पहचाने चेहरे हैं गोपाल सिंह। ‘कंपनी’, ‘ट्रैफिक सिग्नल’, ‘हेट स्टोरी’, ‘एक हसीना थी’ जैसी कई फिल्मों में आ चुके गोपाल पिछले दिनों ‘बुद्धा इन ए ट्रैफिक जाम’ में आए और अब वह मैराथन ब्वाॅय बुधिया पर बनी फिल्म ‘बुधिया सिंह-बोर्न टू रन’ में आ रहे हैं जो 5 अगस्त, 2016 को रिलीज हो रही है। आज सुबह ही गोपाल से फोन पर ये फटाफट बातें हुईंः-

-इस फिल्म का नाम तो पहले ‘दूरंतो’ था न?

-हां, लेकिन वायकाॅम 18 ने जब यह फिल्म खरीदी तो उन्हें लगा कि ‘बुधिया सिंह’ नाम इस के लिए ज्यादा मुफीद रहेगा क्योंकि लोग बुधिया को नाम से जानते हैं और सिर्फ नाम से ही यह समझ में आ जाएगा कि यह फिल्म किस बारे में है।

-वायकाॅम जैसी कंपनियों का इस तरह की छोटे बजट की फिल्मों से जुड़ना कितना फायदेमंद रहता है?

-बहुत ज्यादा। इससे हर किसी को फायदा होता है। फिल्म का उचित प्रचार होता है, ठीक से इनकी मार्केटिंग हो जाती है और ऐसी जगहों तक भी फिल्में पहुंच पाती हैं जहां एक छोटा प्रोड्यूसर अपने दम पर इन्हें नहीं पहुंचा पाता है। हम जैसे कलाकारों को भी संतुष्टि होती है कि जो काम किया वह लोगों तक पहुंच पाया वरना कई बार तो इस तरह की फिल्में न तो ठीक तरह से रिलीज हो पाती हैं और न ही देखी जाती हैं।

-‘बुधिया सिंह’ तो बुधिया और उसके कोच की कहानी है। आप इसमें क्या कर रहे हैं?

-इस फिल्म में मैं उस आदमी का किरदार निभा रहा हूं जो बुधिया का सौतेला पिता है जिसके साथ उसकी मां रहती है। उसकी और बुधिया के कोच बिरंची की, जिसका रोल मनोज वाजपेयी ने किया है, आपस में हमेशा तनातनी लगी रहती है। मैं यह नहीं कहता कि बहुत बड़ा रोल है, लेकिन काफी अहम रोल है और मुझे इसे करके काफी मजा आया।

-आगे क्या कर रहे हैं?

-एक काॅमेडी फिल्म ‘3 देव’ का मुझे काफी बेसब्री से इंतजार है जिसमें के.केे, करण सिंह ग्रोवर, जो बिपाशा बसु के पति हैं, आदि हैं। यह एक जबर्दस्त फिल्म होगी और मुझे उम्मीद है कि इसकी काफी चर्चा होगी। इसके अलावा मैं इन दिनों एक खास चीज यह कर रहा हूं कि अभिनेत्री नंदिता दास कुछ पुराने नाटकों को फिल्मों में तब्दील कर रही हैं। उनके साथ अभी एक फिल्म में काम किया है और आगे भी कुछ करने जा रहा हूं।

-दीपक दुआ