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Sunday, 18 April 2021

रिव्यू-कामुकता और क्राइम की अजीब दास्तानें

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एंथोलॉजी यानी लगभग एक ही जैसे विषय पर कही गईं अलग-अलग कहानियों को एक ही फिल्म में पिरोना। हिन्दी सिनेमा वालों ने भी हिम्मत करके गाहे-बगाहे इस शैली को अपनाया है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई यह फिल्मअजीब दास्तान्सभी ऐसी ही चार दास्तानों को सामने ला रही है जो कमोबेश एक ही धागे से बंधी हुई हैं लेकिन इनमें आपस में कोई नाता नहीं है। असल में यह चार अलग-अलग निर्देशकों की बनाई चार शॉर्ट-फिल्मों का एक संकलन है जिसे एक ही थाली में रख कर परोसा गया है। हर किसी की अपनी-अपनी पसंद की फिल्म अलग-अलग हो सकती है। मगर आइए, पहले इनके गुण-दोषों की बात कर लें।

Friday, 5 August 2016

रिव्यू-द ‘झंड’ ऑफ माइकल मिश्रा

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अरशद सर आपको एक फिल्म में लेना है, कहानी यह है कि...!
अरे छोड़ यार, पैसे कितने दोगे, यह बोलो...?
अदिति मैम, आप अरशद वारसी की हीरोइन होंगी, कहानी...!
छोड़िए भी, पैसे बताइए...!
बोमन सर, आपको और आपके बेटे को एक साथ लेंगे।
ओह गुड, डन। पैसे बोलो...!
प्रोड्यूसर जी, अरशद-अदिति-बोमन राजी हो गए हैं। कहानी सुन लीजिए...।
अरे छोड़ यार, पैसे बोल कितने लगेंगे...?