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Thursday, 9 April 2020

वेब-रिव्यू : लचर कहानी पर बनी ‘शी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल किसी पुलिस स्टेशन से एक आम कांस्टेबल को अपने साथ जोड़ कर उसे कॉल गर्ल बना कर नशे के सौदागरों के पास भेजती है। टार्गेट है इनके सरगना नायक को पकड़ना। पहले पकड़ में आता है नायक का खास आदमी सस्या। उसकी दी हुई खबरों से पुलिस आगे बढ़ती है और नायक तक पहुंचना चाहती है। क्या वह सफल होती है? क्या वह लड़की इन लोगों को रिझा पाने में कामयाब हो पाती है जो शक्ल-सूरत से इतनी आम है कि खुद उसका पति तक उसे छोड़ देता है?

Friday, 24 March 2017

रिव्यू-‘मर्दाना सोच’ पर प्रहार करती है अनारकली

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
चौराहों पर भीख मांगते भिखारी, बाजीगरी दिखा कर पैसे के लिए हाथ पसारते बच्चे, गलियों में आकर बंदर, सांप का खेल दिखाने वाले मदारी, मौहल्ले के किसी घर में खुशी के मौके पर नाचने-गाने वाले हिजड़े, उनके साथ ढोलकी-हारमोनियम बजाने वाले साजिंदे। ऐसे किरदार हम रोजाना अपने इर्द-गिर्द देखते हैं। पर क्या हम उन्हें सचमुच देखतेहैं? क्या कभी हम यह सोचते हैं कि अपना पिरोगरामखत्म करने के बाद ये लोग कहां जाते हैं, कैसे जीते हैं, क्या हैं उनकी जिंदगी के संघर्ष, उनके सपने? इस फिल्म की नायिका अनारकली ऐसा ही एक किरदार है जो समाज में है तो सही लेकिन उसका कोई वजूद नहीं है। और जब वह अपने वजूद की, अपनी मर्जी की बात करती है तो उसे दुत्कार दिया जाता है।

Wednesday, 22 March 2017

स्वरा भास्कर की नजर में क्या है ‘अनारकली’ की खासियत...?



-दीपक दुआ...

आपकी मानसिकता के हिसाब से शायद अनारकली चरित्रहीन है, शायद बदचलन है। हां है, तो...? यह फिल्म यहां से बहस को आगे लेकर जाती है।

अनारकली ऑफ़ आराकी यूएसपी क्या है? यह सवाल स्वरा भास्कर से पूछा जाए तो वह चुप नहीं बैठतीं। इस फिल्म को लेकर वह खासी उत्साहित हैं और जैसा कि उन्होंने कहा भी कि जब उन्हें यह कहानी सुनाई गई थी तो उन्हें ऑस्कर की मूरत सामने दिखाई दे रही थी। भरी प्रैस-कांफ्रेंस में वह आपस में बात करने वालों को हड़का भी सकती हैं और बेबाक तरीके से अपनी बात भी रख सकती हैं। यह हैं स्वरा भास्कर। सुनिए उन्हें, देखिए उन्हें।

मजबूरन करनी पड़ी पंकज त्रिपाठी को ‘अनारकली’



-दीपक दुआ...

पंकज त्रिपाठी यारों के यार हैं। हम दोनों बरसों से एक-दूसरे से फोन पर बतियाते रहे हैं, पर मिले कभी नहीं थे। अनारकली ऑफ़ आराके प्रचार के लिए पंकज का दिल्ली आना हुआ तो अपन उन्हें शुभकामनाएं देने जा पहुंचे और भाई ने आते ही पूरी भीड़ में आगे बढ़ कर जो गले से लगाया, जिगरा गदगद हो उठा। फिल्म और उनके कैरियर को लेकर पंकज से अक्सर बातें होती रही हैं। प्रैस-कांफ्रेंस में पत्रकार मुर्तजा अली ने उनसे पूछा कि पोस्टरों पर तो आप कहीं नहीं दिखाई दे रहे, तो आपने फिल्म क्या सोच कर साइन की थी?

पंकज त्रिपाठी का जवाब था-क्योंकि यह उनके दोस्त (अविनाश दास) की फिल्म है। उन्होंने यह रहस्य भी खोला कि इस फिल्म में रंगीला का किरदार उन्होंने दरअसल अभिनेता संजय मिश्रा की जिद पर स्वीकार किया। देखिए, कैसे पंकज हंसते-हंसाते पूरी बात बताते हैं।

जैसी सोची थी उससे बेहतर बनी ‘अनारकली’-अविनाश दास



-दीपक दुआ...
अनारकली ऑफ़ आराके बारे में अविनाश दास ने मुझ से 2012 में अपनी पहली ही मुलाकात में जिक्र किया था। आज यह फिल्म तैयार है, पर्दे पर आने वाली है। तो क्या यह वैसी बन पाई, जैसी कभी उन्होंने सोची थी?

अविनाश कहते हैं कि यह उससे कहीं बेहतर बनी है क्योंकि जब उन्होंने इसे बनाने के बारे में सोचा था तब वह अकेले थे लेकिन जब यह बननी शुरू हुई तो इससे जुड़े हर शख्स ने इसमें पूरा सहयोग दिया। यह अविनाश की बहुत बड़ी खूबी रही है कि वह किसी भी काम का श्रेय खुद को कम से कम देना पसंद करते हैं। अनारकली ऑफ़ आराउनके खुद के सपनों की उड़ान है और देखिए, कितनी विनम्रता से वह इसका श्रेय दूसरों को बांट रहे हैं।