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Monday, 30 August 2021

ओल्ड रिव्यू-हंसाता नहीं खिजाता है यह ‘जोकर’

-दीपक दुआ...  (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
भारत के अंदरूनी इलाके का एक ऐसा गांव पगला पुर, जो किसी नक्शे में ही नहीं है। ऐसे में वहां कोई सुविधाएं हों भी तो कैसे? उसी गांव से निकल कर अमेरिका जाकर साईंटिस्ट बन गया (भई वाह...!) एक युवक अपनी दोस्त के साथ एक दिन वहां लौटता है और जब सरकार साथ नहीं देती तो वह जुट जाता है किसी तरह से अपने गांव को चर्चा में लाने के लिए। खबर फैलाई जाती है कि इस गांव में दूसरे ग्रह के वासी उतरे हैं।

Friday, 30 July 2021

रिव्यू-मंज़िल तक पहुंचाती ‘मिमी’


-दीपक दुआ...  (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
अमेरिका से आया एक जोड़ा राजस्थान की लड़की मिमी को 20 लाख रुपए में सरोगेट मदर बनने पर राज़ी करता है। यानी अब मिमी इस जोड़े के बच्चे को 9 महीने तक अपनी कोख में रखेगी और बच्चा पैदा करके उन्हें सौंप देगी। लेकिन अचानक यह जोड़ा लापता हो जाता है। अब मिमी अपने घरवालों को, समाज को क्या जवाब देगी...? बच्चा हुआ, मिमी उसे पालने लगी। कुछ साल बाद वे गोरे धमके और उससे अपना बच्चा मांगने लगे। अब मिमी क्या करेगी...?

Saturday, 26 June 2021

रिव्यू-अच्छी ‘रे’ सच्ची ‘रे’ पक्की ‘रे’ कच्ची ‘रे’

-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
.टी.टी. पर इधर एक अच्छी चीज़ उभर कर आई है जिसका नाम है-एंथोलॉजी। यानी लगभग एक ही जैसे विषय पर कही गईं अलग-अलग कहानियों को एक जगह दिखाना। खासतौर से नेटफ्लिक्स पर ऐसी कहानियां काफी रही हैं। इधर आईरेभी एक एंथोलॉजी है जिसमें महान फिल्मकार सत्यजित रे की लिखी चार कहानियों पर बनी चार फिल्में हैं। रे सिर्फ फिल्मकार ही नहीं, लेखक, गीतकार, संगीतकार, चित्रकार, पत्रकार और भी जाने क्या-क्या थे। इन चारों कहानियों की खासियत यह है कि इनके केंद्र में मुख्यतः पुरुष पात्र हैं जिनकी सोच, मनोदशा, आदतों, बातों आदि के ज़रिए ये कहानियां कुछ कहती हैं। क्या कहती हैं, आइए देखें।
 

Wednesday, 16 June 2021

ओल्ड रिव्यू-ज़मीनी सच्चाई दिखाती ‘उड़ता पंजाब’

-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
एक सीन देखिए-बिहार से आकर पंजाब के खेतों में काम कर रही मज़दूर (आलिया भट्ट) कहती है-‘हमने कभी बीड़ी नहीं पिया और पंजाब में इन लोगों ने हमको सुई (नशे) का आदत लगा दिया।इस पर नशा छोड़ कर सुधरने की कोशिश कर रहा रॉकस्टार टॉमी सिंह (शाहिद कपूर) सवाल करता है-‘तो फिर छोड़ क्यों नहीं देती?’ सवाल के बदले वह पूछती है-‘क्या, पंजाब या सुई?’ जवाब मिलता है-‘एक ही बात है...!’
 
यह इस फिल्म की कहानी का सच है जो बताता है कि कैसे देश के सबसे अमीर सूबों में गिने जाने वाले पंजाब के गबरू जवान नशे के शिकार होकर परिवार और समाज पर बोझ हुए जा रहे हैं। कैसे यह पांच दरियाओं की धरती नशे का पर्याय बन चुकी है। और यह भी कि अगर आपको नशा छोड़ना है तो आपको यह जगह छोड़नी होगी क्योंकि यहां तो हर जगह नशे का राज है।