-दीपक दुआ... (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
भारत के अंदरूनी इलाके का एक ऐसा गांव पगला पुर, जो किसी नक्शे में ही नहीं है। ऐसे में वहां कोई सुविधाएं हों भी तो कैसे? उसी गांव से निकल कर अमेरिका जाकर साईंटिस्ट बन गया (भई वाह...!) एक युवक अपनी दोस्त के साथ एक दिन वहां लौटता है और जब सरकार साथ नहीं देती तो वह जुट जाता है किसी तरह से अपने गांव को चर्चा में लाने के लिए। खबर फैलाई जाती है कि इस गांव में दूसरे ग्रह के वासी उतरे हैं।
भारत के अंदरूनी इलाके का एक ऐसा गांव पगला पुर, जो किसी नक्शे में ही नहीं है। ऐसे में वहां कोई सुविधाएं हों भी तो कैसे? उसी गांव से निकल कर अमेरिका जाकर साईंटिस्ट बन गया (भई वाह...!) एक युवक अपनी दोस्त के साथ एक दिन वहां लौटता है और जब सरकार साथ नहीं देती तो वह जुट जाता है किसी तरह से अपने गांव को चर्चा में लाने के लिए। खबर फैलाई जाती है कि इस गांव में दूसरे ग्रह के वासी उतरे हैं।



