Showing posts with label imtiaz ali. Show all posts
Showing posts with label imtiaz ali. Show all posts

Thursday, 9 April 2020

वेब-रिव्यू : लचर कहानी पर बनी ‘शी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल किसी पुलिस स्टेशन से एक आम कांस्टेबल को अपने साथ जोड़ कर उसे कॉल गर्ल बना कर नशे के सौदागरों के पास भेजती है। टार्गेट है इनके सरगना नायक को पकड़ना। पहले पकड़ में आता है नायक का खास आदमी सस्या। उसकी दी हुई खबरों से पुलिस आगे बढ़ती है और नायक तक पहुंचना चाहती है। क्या वह सफल होती है? क्या वह लड़की इन लोगों को रिझा पाने में कामयाब हो पाती है जो शक्ल-सूरत से इतनी आम है कि खुद उसका पति तक उसे छोड़ देता है?

Saturday, 15 February 2020

रिव्यू-उलझ कर रह गया है ‘लव आज कल’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इस फिल्म के लेखक-निर्देशक इम्तियाज़ अली खुद यह बात मान चुके हैं कि इसे बनाने का आइडिया उन्हें दोस्तों की एक बैठक में आया कि 2009 में आई उनकी फिल्म लव आज कलके किरदार अगर आज के समय में होते तो कैसे बर्ताव करते। आगे की कहानी यह है कि दोस्तों की उस बैठक में एक तो होंगे निर्माता दिनेश विजन जिन्होंने पिछली वाली लव आज कलसे खूब नोट छापे थे सो इस फिल्म पर पैसा लगाने से नहीं हिचके होंगे। दूसरे होंगे सैफ अली खान जिन्होंने कहा होगा-यार, मेरी बेटी को ले ले इस बार। वो बेचारी भी कोई कायदे की फिल्म कर लेगी जिसे देख कर लोग कहेंगे-वाओ...! पर क्या ऐसा हो पाया?

Friday, 23 November 2018

ओल्ड रिव्यू-‘तमाशा’ नाटक नहीं नौटंकी है

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बनना कुछ चाहते थे, बन कुछ गए। या फिर करना कुछ और चाहते थे और कर कुछ और रहे हैं। इस आइडिया पर हिन्दी फिल्में बनाने वाले व्यापारीहमें इतना कुछ परोस चुके हैं कि अब इस आइडिया के नाम से ही कोफ्त होने लगती है। लेकिन इमित्याज अली कुछ लेकर आएं तो लगता है कि उसमें कुछ अलग होगा। माल अलग नहीं हुआ तो उसे परोसने का अंदाज ही अलग होगा। इस फिल्म में वही है। कहानी पुरानी अंदाज नया। मगर क्या यह अंदाज रोचक भी है? कत्तई नहीं।

Saturday, 8 September 2018

रिव्यू-कचरा लव-स्टोरी है ‘लैला मजनू’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
दो परिवार। दोनों में अदावत। दोनों के बच्चे आपस में प्यार कर बैठे। घरवालों ने उन्हें जुदा कर दिया तो दोनों ने एक-दूसरे के लिए तड़पते हुए जान दे दी। यही तो कहानी थी लैला मजनू की। इसी कहानी पर बरसों से फिल्में बनती रहीं। कामयाब भी होती रहीं। क्यों...? क्योंकि उनमें मोहब्बत की वो तासीर थी कि दिल सायं-सायं करता था। भावनाओं के वो दरिया थे जो हमारी आंखों से बहते थे। इश्क का वो रूहानी अहसास था जो सिर्फ महसूस किया जा सकता है, बयान नहीं। लेकिन अफसोस, इस फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो आपको छू तक सके।

Saturday, 5 August 2017

रिव्यू-जब बोरियत मैट सुस्ती

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
हैरी यानी हरिंदर सिंह नेहरा पंजाब से भाग कर कनाडा चला गया था क्योंकि उसे गायक बनना था। गायक वह कमाल का है। उसके गले से अरिजीत सिंहदिलजीत दोसांझ, शाहिद माल्लया, मोहित चौहान जैसी ढेरों आवाजें निकलती रहती हैं। (पता नहीं हमारे फिल्म वाले अब एक हीरो को एक आवाज देने में इतना झिझकते क्यों हैं।) खैर, गायक वह बन नहीं पाया। क्यों नहीं बन पाया, इसका कोई कारण निर्देशक आपको बताना जरूरी नहीं समझता। हट परे...! सो, अब हैरी यूरोप में किसी ट्रेवल कंपनी में टूर गाइड है। वह तन्हा है, उदास है, कुछ है जो उसे सालता है, उस पर औरतखोर होने के आरोप भी हैं। सब क्यों हैं, यह भी डायरेक्टर आपको नहीं बताना चाहते। चुपचाप फिल्म देखिए ...! मुंबई से आए एक गुजराती परिवार को महीने भर का टूर करवाने के बाद उन्हें एयरपोर्ट छोड़ कर वह बाहर निकलता है तो उसी परिवार की सेजल जावेरी उसके पीछे पड़ जाती है कि वह उसके साथ टूर में गुम हो चुकी उसकी सगाई की अंगूठी खोजने में मदद करे। उस रिंग को तलाशते-तलाशते ये दोनों एक-दूसरे को प्यार करने लगते हैं।