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Thursday, 9 April 2020

वेब-रिव्यू : लचर कहानी पर बनी ‘शी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल किसी पुलिस स्टेशन से एक आम कांस्टेबल को अपने साथ जोड़ कर उसे कॉल गर्ल बना कर नशे के सौदागरों के पास भेजती है। टार्गेट है इनके सरगना नायक को पकड़ना। पहले पकड़ में आता है नायक का खास आदमी सस्या। उसकी दी हुई खबरों से पुलिस आगे बढ़ती है और नायक तक पहुंचना चाहती है। क्या वह सफल होती है? क्या वह लड़की इन लोगों को रिझा पाने में कामयाब हो पाती है जो शक्ल-सूरत से इतनी आम है कि खुद उसका पति तक उसे छोड़ देता है?

Saturday, 7 March 2020

रिव्यू-क्यों तारीफों के काबिल है ‘बागी 3’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एकदम डिफरेंट किस्म की फिल्म है यह। एक लड़का है, बचपन से ही बागी किस्म का। यहां तक कि अपने बाप को भी नाम से बुलाता है (हालांकि संस्कारी है, पर पता नहीं यह ऐब उसमें कहां से आया) जहां भी उसके भाई पर कोई मुसीबत आती है, यह उसे बचाने पहुंच जाता है। यहां डिफरेंट बात यह है कि यहां पर मुसीबत में बड़ा भाई घिरता है और बचाने का काम छोटा भाई करता है। कहिए, है एकदम ही अलग किस्म की कहानी...? तालियां...!

Thursday, 14 February 2019

रिव्यू-‘गली बॉय’-ब्राउन एंड ब्यूटीफुल

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
मुंबई 17, बोले तो धारावी का इलाका। झोंपड़पट्टी, कचरापट्टी, गुज़रने को तंग गलियां, रहने को तंग खोलियां, तंग सोच, तंग दिल। लेकिन यहां रहने वाले मुराद को उठना है, उड़ना है क्योंकि उसे लगता है कि अपना टाइम आएगा। रैप लिखते-लिखते वह गाने भी लगता है। हालांकि उसके मामा का मानना है कि नौकर का बेटा नौकर ईच बनेगा, यही फितरत है। मामी कहती है कि गाना ही है तो ग़ज़ल गा लो। उसका ड्राईवर बाप भी कहता है कि सपने वो देखो जो तुम्हारी असलियत से मैच करते हों। पर मुराद का कहना है कि वह अपनी असलियत बदलेगा ताकि वो उसके सपनों से मैच कर सके।