साल में चार दिन उस कस्बे में पूजा होती है। इन्हीं चार दिनों में आती है एक भूतनी। जिस घर के बाहर ‘ओ स्त्री कल आना’ लिखा होता है,
उसमें नहीं जाती। वरना रातों को मर्द उठा कर ले जाती है वह। सिर्फ मर्द, उनके कपड़े नहीं। कहते हैं कि ये भूतनी मर्दों की प्यासी है। जो उसकी आवाज़ पर पलटा,
वह गायब। इसी कस्बे के तीन दोस्तों में से एक से पूजा के दिनों में मिलती है एक अनजान लड़की। न कोई नाम,
न नंबर। अचानक आती है,
अचानक गायब हो जाती है। कहीं यह लड़की ही वह ‘स्त्री’ तो नहीं...?
