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Sunday, 18 April 2021

रिव्यू-कामुकता और क्राइम की अजीब दास्तानें

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एंथोलॉजी यानी लगभग एक ही जैसे विषय पर कही गईं अलग-अलग कहानियों को एक ही फिल्म में पिरोना। हिन्दी सिनेमा वालों ने भी हिम्मत करके गाहे-बगाहे इस शैली को अपनाया है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई यह फिल्मअजीब दास्तान्सभी ऐसी ही चार दास्तानों को सामने ला रही है जो कमोबेश एक ही धागे से बंधी हुई हैं लेकिन इनमें आपस में कोई नाता नहीं है। असल में यह चार अलग-अलग निर्देशकों की बनाई चार शॉर्ट-फिल्मों का एक संकलन है जिसे एक ही थाली में रख कर परोसा गया है। हर किसी की अपनी-अपनी पसंद की फिल्म अलग-अलग हो सकती है। मगर आइए, पहले इनके गुण-दोषों की बात कर लें।

Tuesday, 16 March 2021

रिव्यू-प्यार की नई परिभाषा गढ़ती ‘सर’

-गति उपाध्याय... (Featured in IMDb Critics Reviews)
नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध इस फिल्मइज़ लव एनफ? सरमें एक तरफ है जवान विधवा काम वाली बाई रत्ना, जो अपने काम, ज़िम्मेदारियों और इमेज के प्रति हर पल सतर्क और चौकन्नी रहती है। दूसरी तरफ उसका मालिक अश्विनसरपरिवार के लिए अपनी खुशियों को ताक पर रख देने वाला गंभीर मिज़ाज का रईस युवा नायक है। अभी-अभी उसकी शादी टूटी है और वह हताश है। रत्ना उसे उम्मीद देती है। एक घर में रहते हुए ये दोनों करीब आते हैं। अश्विन कोलोग क्या कहेंगेकी परवाह नहीं लेकिन रत्ना के लिए यह रिश्ता इतना आसान नहीं।

Saturday, 11 July 2020

ओल्ड रिव्यू-देस की बात, लोगों की बात ‘स्वदेस’ में

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
प्रहारके अंत में मेजर चव्हाण कहते हैं कि देश का मतलब क्या है? नदियां, पहाड़, सड़कें, इमारतें बस। और लोग कहां हैं? आशुतोष गोवारीकर की यह फिल्म इन्हीं लोगों के बारें में बात करती है, हम लोगों के बारे में बात करती है। वह बात करती है जिसे करना बॉक्स-ऑफिस की नज़र से जोखिम भरा हो सकता है लेकिन एक प्रतिबद्ध और जागरूक फिल्मकार और नागरिक के तौर पर ऐसी बातें होनी चाहिएं, होती रहनी चाहिएं।