एंथोलॉजी यानी लगभग एक ही जैसे विषय पर कही गईं अलग-अलग कहानियों को एक ही फिल्म में पिरोना। हिन्दी सिनेमा वालों ने भी हिम्मत करके गाहे-बगाहे इस शैली को अपनाया है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई यह फिल्म ‘अजीब दास्तान्स’ भी ऐसी ही चार दास्तानों को सामने ला रही है जो कमोबेश एक ही धागे से बंधी हुई हैं लेकिन इनमें आपस में कोई नाता नहीं है। असल में यह चार अलग-अलग निर्देशकों की बनाई चार शॉर्ट-फिल्मों का एक संकलन है जिसे एक ही थाली में रख कर परोसा गया है। हर किसी की अपनी-अपनी पसंद की फिल्म अलग-अलग हो सकती है। मगर आइए,
पहले इनके गुण-दोषों की बात कर लें।
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Sunday, 18 April 2021
रिव्यू-कामुकता और क्राइम की अजीब दास्तानें
Tuesday, 25 September 2018
रिव्यू-नदी और सागर का प्यार है ‘वन्स अगेन’
एक नदी है। अकेली बहे जाती है। दूसरों को सींचती हुई। एक समंदर है। विशाल, अथाह मगर वीरान, खारा। चाहता है कि नदी आकर उसका साथ निभाए, उसमें ज़रा मिठास घोले। पर नदी हिचकती है। पास आना चाहते हुए भी समंदर में मिलने से डरती है। डरती है कि लोग क्या कहेंगे? या शायद कहीं उसका वजूद न मिट जाए।
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