एक नेता ने अपने पाले हुए गुंडे के हाथों दूसरे नेता को दस करोड़ रुपए से भरा सूटकेस भेजा। उस सूटकेस में एक फाइल भी थी। रास्ते में दूसरे गैंग ने हमला कर दिया और सूटकेस गया छूट। देर रात की नौकरी से लौटते एक आम आदमी को वह मिला और वह उसे घर ले आया। अब नेता, उसके गुंडे, उसका पाला हुआ पुलिस वाला, दूसरे गैंग्स्टर के गुंडे, सब उस आदमी के पीछे पड़े हैं। और वह आदमी है कि उस पैसे के बारे में अपने बीवी-बच्चों को भी नहीं बता सकता।
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Saturday, 15 August 2020
रिव्यू-मनोरंजन की दौलत है इस ‘लूटकेस’ में
एक नेता ने अपने पाले हुए गुंडे के हाथों दूसरे नेता को दस करोड़ रुपए से भरा सूटकेस भेजा। उस सूटकेस में एक फाइल भी थी। रास्ते में दूसरे गैंग ने हमला कर दिया और सूटकेस गया छूट। देर रात की नौकरी से लौटते एक आम आदमी को वह मिला और वह उसे घर ले आया। अब नेता, उसके गुंडे, उसका पाला हुआ पुलिस वाला, दूसरे गैंग्स्टर के गुंडे, सब उस आदमी के पीछे पड़े हैं। और वह आदमी है कि उस पैसे के बारे में अपने बीवी-बच्चों को भी नहीं बता सकता।Friday, 7 February 2020
रिव्यू-रंगीनियों के अंधेरे में गुम ‘मलंग
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
आमतौर पर ‘मलंग’
अपनी धुन में मस्त रहने वाले लोगों को कहा जाता है। यह कहानी भी ऐसे ही कुछ लोगों की है जो अपने-आप में मस्त हैं। लेकिन एक जगह आकर इनकी राहें टकरा जाती हैं और तब शुरू होता है एक खूनी खेल। जेल से छूटा अद्वैत (आदित्य रॉय कपूर) 24 दिसंबर की रात को एक-एक करके कुछ पुलिस अफसरों को मार रहा है। क्यों...? ज़ाहिर है इसका कारण उसके अतीत में है। उसकी प्रेमिका सारा (दिशा पाटनी) बार-बार उसे याद आती है। क्यों...? पुलिस इंस्पैक्टर माइकल (माइकल)
और अगाशे (अनिल कपूर) उसे रोकने में लगे हैं। अचानक वह सैरेंडर कर देता है। क्यों...?
आमतौर पर ‘मलंग’
अपनी धुन में मस्त रहने वाले लोगों को कहा जाता है। यह कहानी भी ऐसे ही कुछ लोगों की है जो अपने-आप में मस्त हैं। लेकिन एक जगह आकर इनकी राहें टकरा जाती हैं और तब शुरू होता है एक खूनी खेल। जेल से छूटा अद्वैत (आदित्य रॉय कपूर) 24 दिसंबर की रात को एक-एक करके कुछ पुलिस अफसरों को मार रहा है। क्यों...? ज़ाहिर है इसका कारण उसके अतीत में है। उसकी प्रेमिका सारा (दिशा पाटनी) बार-बार उसे याद आती है। क्यों...? पुलिस इंस्पैक्टर माइकल (माइकल)
और अगाशे (अनिल कपूर) उसे रोकने में लगे हैं। अचानक वह सैरेंडर कर देता है। क्यों...?Sunday, 21 April 2019
रिव्यू-सिनेमा की हीरा मंडी में जन्मी एक नाजायज़ फिल्म-'कलंक'
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
प्यार, नफरत, गुस्सा, घृणा, त्याग, ममता, हास्य, वगैरह-वगैरह जैसी बहुत सारी फीलिंग्स किसी कहानी को पढ़ते-देखते समय हमारे मन में उपजती है। पर क्या आप यकीन करेंगे कि 'कलंक' देखते समय किसी किस्म का कोई भाव ही नहीं उपजता। इस कदर भावशून्य कहानी है कि फ़िल्म शुरू होने के बाद फ़िल्म से, खुद से, ज़िंदगी से भरोसा उठने लगता है। मन होता है कि थिएटर में सो जाएं, या बेहतर होगा कि ऐसी फ़िल्म देखने से तो अच्छा है, मर ही जाएं...!
प्यार, नफरत, गुस्सा, घृणा, त्याग, ममता, हास्य, वगैरह-वगैरह जैसी बहुत सारी फीलिंग्स किसी कहानी को पढ़ते-देखते समय हमारे मन में उपजती है। पर क्या आप यकीन करेंगे कि 'कलंक' देखते समय किसी किस्म का कोई भाव ही नहीं उपजता। इस कदर भावशून्य कहानी है कि फ़िल्म शुरू होने के बाद फ़िल्म से, खुद से, ज़िंदगी से भरोसा उठने लगता है। मन होता है कि थिएटर में सो जाएं, या बेहतर होगा कि ऐसी फ़िल्म देखने से तो अच्छा है, मर ही जाएं...!Friday, 20 October 2017
रिव्यू-‘गोलमाल’ है भई सब झोलझाल है...
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
‘गोलमाल’ जैसी फिल्में बनाई ही इसलिए जाती हैं ताकि आपको ‘सब कुछ’
(जी हां,
सब कुछ) भुला कर मसालेदार,
चटपटा मनोरंजन परोसा जा
सके जिसमें भले ही दिमागहीन बाते हों लेकिन जिन्हें देख-सुन कर आप हंसे और कुछ पल के
लिए ही सही, उन नॉनसेंस चीजों को भी एन्जॉय करें। इस फ़ॉर्मूले को रोहित अपनी कॉमेडी फिल्मों
में परोसते आए हैं और हर बार सफल भी रहे हैं। यह फिल्म भी इस काम में कामयाब रही है।
काफी सारे सीन और संवाद ऐसे हैं जो आपको हंसाते हैं। हालांकि इसकी ढाई घंटे की लंबाई
कई जगह बेवजह खिंचती हुई भी लगती है लेकिन जब सामने मसालों की बौछार हो तो किसे फर्क
पड़ता है।
ऐसी फिल्मों में एक्टिंग की गहराई या निर्देशन की संजीदगी की बात भी नहीं की जाती।
हां, कुछ सरप्राइज एलिमेंट जरूर हैं जो अच्छे लगते हैं। रही म्यूजिक की बात,
तो ऐसी फिल्मों में गाने
इसलिए होते हैं ताकि उस दौरान आप बाहर जाकर खुद हल्के हो लें और पॉपकॉर्न-बर्गर वगैरह
पर अपनी जेब हल्की कर आएं।
सबसे पहले कहानी की बात। हंसिए मत, ‘गोलमाल’
जैसी फिल्मों में भी कहानी
होती है। भले ही वह कितनी ही महीन, बारीक,
पतली,
हल्की,
कमजोर,
बेकार या ऊल-जलूल क्यों
न हो। तो, इस कहानी में ‘गोलमाल’ वाले सारे कैरेक्टर ऊटी के एक
अनाथाश्रम में पले-बढ़े हैं। उस अनाथाश्रम के सेठ जी को मारने के बाद वहां की जमीन को
कोई हड़पना चाहता है और ये लोग मिल कर उस विलेन से लड़ते हैं। इस काम में ये एक भूतनी
की और वह भूतनी इनकी मदद करती है। उधर एक लाइब्रेरियन है जिसे भूत दिखाई देते हैं।
क्यों? और इन सबको भी वह भूतनी दिखती है, किसी और को नहीं। क्यों?
ये लोग आए तो उस भूतनी
की मदद करने हैं, लेकिन देखा जाए तो वह भूतनी ही
अपने-आप सब कुछ सुलटा लेती है। क्यों? और अगर भूतनी ने ही सब कुछ करना
था तो वह इन पर निर्भर ही क्यों थी? ऐसे ढेर सारे ‘क्यों’
आपके मन में आ सकते हैं।
पर जिस फिल्म को बनाने वालों ने उसके पोस्टर पर ही ‘लॉजिक नहीं सिर्फ मैजिक’
लिख दिया हो,
उसे देखते हुए ऐसे सवाल
मन में लाना इल्लॉजिकल है, गुनाह है,
गुनाह-ए-अजीम है।
‘गोलमाल’ जैसी फिल्में बनाई ही इसलिए जाती हैं ताकि आपको ‘सब कुछ’
(जी हां,
सब कुछ) भुला कर मसालेदार,
चटपटा मनोरंजन परोसा जा
सके जिसमें भले ही दिमागहीन बाते हों लेकिन जिन्हें देख-सुन कर आप हंसे और कुछ पल के
लिए ही सही, उन नॉनसेंस चीजों को भी एन्जॉय करें। इस फ़ॉर्मूले को रोहित अपनी कॉमेडी फिल्मों
में परोसते आए हैं और हर बार सफल भी रहे हैं। यह फिल्म भी इस काम में कामयाब रही है।
काफी सारे सीन और संवाद ऐसे हैं जो आपको हंसाते हैं। हालांकि इसकी ढाई घंटे की लंबाई
कई जगह बेवजह खिंचती हुई भी लगती है लेकिन जब सामने मसालों की बौछार हो तो किसे फर्क
पड़ता है।
ऐसी फिल्मों में एक्टिंग की गहराई या निर्देशन की संजीदगी की बात भी नहीं की जाती।
हां, कुछ सरप्राइज एलिमेंट जरूर हैं जो अच्छे लगते हैं। रही म्यूजिक की बात,
तो ऐसी फिल्मों में गाने
इसलिए होते हैं ताकि उस दौरान आप बाहर जाकर खुद हल्के हो लें और पॉपकॉर्न-बर्गर वगैरह
पर अपनी जेब हल्की कर आएं।
‘गोलमाल’ सीरिज की फिल्में असल में तीखे-चटपटे मसालों का झोलझाल होती हैं। इन्हें बिना दिमाग
को कष्ट दिए देखना चाहिए। यह हुनर और हिम्मत आपके पास हो तो इस फिल्म को जरूर देखिए,
दोस्तों के साथ,
फैमिली के साथ।
अपनी रेटिंग-ढाई स्टार
Tuesday, 17 October 2017
दिवाली की बाज़ी किसके हाथ...!
-दीपक दुआ...
दिवाली वाला हफ्ता हो और बड़ी फिल्में आकर एक-दूजे को चुनौती न दें तो कुछ सूना-सूना, सूखा-सूखा सा लगने लगता है। हर साल दिवाली के मौके पर दो-तीन बड़ी फिल्में एक-दूसरे को टक्कर देती हैं। इस साल रोहित शैट्टी की ‘गोलमाल अगेन’ और आमिर खान के बैनर से आ रही ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ दिवाली पर आमने-सामने होंगी।
दिवाली यानी ‘हॉट-स्पॉट’
साल भर में ईद, दिवाली, क्रिसमस, 15 अगस्त जैसे चंद ही मौके होते हैं जब एक साथ दो-तीन बड़ी फिल्में आकर एक-दूसरे को टक्कर देने का दम रखती हैं। दरअसल दिवाली का मौका ऐसा होता है जब हर कोई सेलिब्रेशन के मूड में होता है और लगभग हर किसी के पास मौज-मजे पर खर्चने के लिए पैसा भी होता है। यही कारण है कि अक्सर दीवाली पर आने वाली कोई कमजोर फिल्म भी अपनी हैसियत से ज्यादा कमाई कर जाती है।
रोहित शैट्टी के डायरेक्शन में आने वाली ‘गोलमाल’
सीरिज की फिल्मों ने हर बार बॉक्स-ऑफिस पर अपना लोहा मनवाया है। इस सीरिज की पहली फिल्म ‘गोलमाल-फन अनलिमिटेड’ जुलाई 2006 में आई थी। करीब 11 करोड़ रुपए में बनी इस फिल्म ने लगभग 70 करोड़ का बिजनेस किया था। फिर 2008 में दिवाली पर आई ‘गोलमाल रिट्न्र्स’ ने अपनी 24 करोड़ की लागत के मुकाबले लगभग 108 करोड़ की कलैक्शन की थी। इस सीरिज की तीसरी फिल्म ‘गोलमाल 3’ भी 2010 में दीवाली के मौके पर आई थी। लगभग 40 करोड़ में बनी इस फिल्म ने 160 करोड़ का कारोबार किया था। यह फिल्म हालांकि पहले की दोनों फिल्मों के मुकाबले हल्की थी लेकिन इसकी कामयाबी के बाद यह तय-सा हो गया था कि रोहित इस श्रृंखला की अगली फिल्में अब दिवाली पर ही लाया करेंगे। और अब रोहित ‘गोलमाल अगेन’ ला रहे हैं जिसकी लागत तकरीबन 70 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस फिल्म का ट्रेलर बताता है कि इस बार काॅमेडी में हाॅरर का टच भी दिया गया है। हालांकि इस ट्रेलर से दर्शक काफी निराश दिख रहे हैं और फिल्मी पंडितों का भी कहना है कि यह फिल्म ज्यादा बड़ा धमाका नहीं कर पाएगी। लेकिन दिवाली का मौका हो और सामने बिना दिमाग लगाए हल्का-फुल्का मनोरंजन मिल जाए तो आमतौर पर वह सफलता पा ही लेता है। बहुत जल्द पता चल जाएगा कि यह ‘गोलमाल’ कितना बड़ा धमाल करेगी।
‘सीक्रेट’ बनेगी सुपरस्टार
आमिर खान के बैनर से कोई फिल्म आ रही हो तो उसका चर्चा में आना और छा जाना स्वाभाविक-सा हो जाता है। हालांकि इस फिल्म में खुद आमिर भी हैं और एक बहुत ही अलग व फनी किस्म के रोल में हैं लेकिन यह भी सच है कि वह इस फिल्म में ज्यादा नजर नहीं आएंगे। दरअसल यह एक ऐसी मुस्लिम लड़की की कहानी है जो संगीत की दुनिया में छा जाना चाहती है लेकिन उसके अब्बू ऐसा नहीं होने देते तो वह बुर्का पहन कर दुनिया के सामने आती है और बन जाती है एक ‘सीक्रेट सुपरस्टार’। इस फिल्म में दिवाली पर आने वाली ज्यादातर फिल्मों की तरह कॉमेडी या रोमांस के मसालों की बजाय म्यूजिक और मैसेज होगा और मुमकिन है कि यह अनोखी बात ही इस फिल्म को हिट बना दे। इसे आमिर खान के मैनेजर अद्वैत चंदन ने लिखा और निर्देशित किया है। आमिर की इस फिल्म के प्रति दर्शकों में उत्सुकता है और लग रहा है कि यह बॉक्स-ऑफिस को जीत ही लेगी।
‘डंगर डॉक्टर’ का क्या होगा?
इस बार दिवाली 19 अक्टूबर, गुरुवार को है और ‘सीक्रेट सुपरस्टार’
उसी दिन आएगी जबकि ‘गोलमाल अगेन’ एक दिन बाद 20 अक्टूबर को रिलीज होगी। ये दोनों ही फिल्में अपने-अपने पत्ते चल रही हैं। ‘गोलमाल अगेन’ की एडवांस बुकिंग एक महीना पहले खुल चुकी है जो अपने-आप में अनोखी बात है। उधर एक पंजाबी फिल्म ‘डंगर डॉक्टर जैली’ इस बीच तेजी से हवा बना रही है। पंजाबी के नामी गायक-अभिनेता रविंदर ग्रेवाल की इस फिल्म के जबर्दस्त कॉमेडी से भरपूर ट्रेलर को देखने के बाद यहां तक कहा जा रहा है कि कम से कम पंजाब में तो यह फिल्म रोहित और आमिर की फिल्मों पर भी भारी पड़ सकती है। असल में क्या होगा, जल्द सामने आ जाएगा।
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