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Monday, 30 August 2021

ओल्ड रिव्यू-हंसाता नहीं खिजाता है यह ‘जोकर’

-दीपक दुआ...  (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
भारत के अंदरूनी इलाके का एक ऐसा गांव पगला पुर, जो किसी नक्शे में ही नहीं है। ऐसे में वहां कोई सुविधाएं हों भी तो कैसे? उसी गांव से निकल कर अमेरिका जाकर साईंटिस्ट बन गया (भई वाह...!) एक युवक अपनी दोस्त के साथ एक दिन वहां लौटता है और जब सरकार साथ नहीं देती तो वह जुट जाता है किसी तरह से अपने गांव को चर्चा में लाने के लिए। खबर फैलाई जाती है कि इस गांव में दूसरे ग्रह के वासी उतरे हैं।

Thursday, 19 August 2021

रिव्यू-कसा हुआ है यह बेबी ‘बेलबॉटम’

-दीपक दुआ...  (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
पहले इसी फिल्म से एक दुख भरी दास्तान सुनिए-‘‘एक बार एक नवजात कुत्ते ने अपनी मां से पूछा कि पिताजी कैसे दिखते थे? इस पर मां ने मायूसी से कहा-पता नहीं बेटा, एक दिन वह पीछे से आए और चुपचाप पीछे से ही चले गए। रॉ (भारत की खुफिया एजेंसी) वही पिताजी है।’’
 
यह सही है कि दुनिया की तमाम खुफिया एजेंसियों की तरह अपनी रॉ भी देश-दुनिया में बहुत कुछ ऐसा करती है जो या तो तुरंत सामने नहीं आता या फिर उसमें रॉ और उसके एजेंटों का ज़िक्र नहीं होता। हमारी फिल्मों ने गाहे-बगाहे हमारे इन जासूसों के कारनामें पर्दे पर उतारे हैं। यह फिल्म भी उसी दिशा में एक कोशिश है-अच्छी, कसी हुई, मनोरंजक।

Sunday, 23 February 2020

मिलिए हॉस्पिटल के सामने फू-फू करते नंदू से

-दीपक दुआ...
क्या नंदू, हॉस्पिटल के सामने खड़े हो के फू-फू कर रहा है?’
बीवी बीमार है, अंदर है।
क्या हुआ भाभी को?’
वही औरतों वाली बीमारी।

पिछले साल-डेढ़ साल में यदि आपने किसी थिएटर में जाकर कोई फिल्म देखी है तो फिल्म से पहले आने वाले इस विज्ञापन को जरूर देखा होगा जिसमें अक्षय कुमार अपने दोस्त नंदू को सैनिटरी पैड के महत्व के बारे में समझाते हैं। हर बार यह विज्ञापन देख कर कभी मन में यह ख्याल भी आता है कि यह नंदू आखिर है कौन जिसे अक्षय कुमार जैसे नामी सितारे के साथ यह विज्ञापन करने का मौका मिला और जिसमें वह एकदम सहज और विश्वसनीय अभिनय भी कर रहा है। बहुत खोजबीन के बाद हम पहुंचे इस नंदू तक और पता चला कि इन महाशय का नाम अजय सिंह पाल है। ग्वालियर में जन्मे और भोपाल में पले-बढ़े अजय कुछ एक फिल्मों के अलावा कई टी.वी. धारावाहिकों में भी काम कर चुके हैं। फिलहाल अजय भोपाल में रहते हैं और एक बिजनेस चलाने के अलावा स्थानीय थिएटर पर भी लगातार सक्रिय हैं। आइए आपको उनसे मिलवाते हैं।

Thursday, 26 December 2019

रिव्यू-मुबारक हो, ‘गुड न्यूज़’ है

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
वरुण बत्रा-दीप्ति बत्रा। पति-पत्नी। बरसों की कोशिश के बाद भी ये दोनों मां-बाप नहीं बन पा रहे थे तो ये लोग पहुंचे डॉ. जोशी के आई.वी.एफ. क्लिनिक में ताकि कृत्रिम गर्भाधान करवा सकें। लेकिन एक गड़बड़ हो गई। वहां चंडीगढ़ से हनी बत्रा-मोनिका बत्रा भी इसी काम से आए हुए थे और क्लिनिक वालों की गलती से वरुण बत्रा के स्पर्म मोनिका की कोख में और हनी बत्रा के दीप्ति की कोख में जा पहुंचे। अब क्या किया जाए?

Sunday, 18 August 2019

रिव्यू-शाबाशियों की हकदार ‘मिशन मंगल’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
भारत ने तय किया कि वह मंगल ग्रह पर अपना यान भेजेगा। अमेरिका, रूस जैसे देश तक पहली कोशिश में  नाकाम हो चुके थे। लेकिन भारतीय वैज्ञानिक जुट गए। दिन-रात एक कर दिया और एक दिन उन्होंने पहली ही कोशिश में मंगल पर अपना यान भेज भी दिया-दूसरे देशों के मुकाबले कहीं कम लागत में, कहीं कम समय में, कहीं ज़्यादा परफैक्शन के साथ।

यह कहानी नहीं, हकीकत है। और अगर इस हकीकत को पूरे हकीकती अंदाज़में दिखाया जाए तो सबसे पहले तमाम दर्शकों को एयरोस्पेस इंजीनियरिंग करवानी पड़ेगी और उसके बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में ले जाकर कम--कम साल भर की इंटर्नशिप। उसके बाद बड़े भारी-भरकम रिसर्च और तगड़ी वैज्ञानिक शब्दावली वाली फिल्म बन कर आएगी जिसे देख कर ये पढ़े-लिखेदर्शक कोई मीनमेख नहीं निकालेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। दूसरा तरीका यह है कि इस फिल्म की तमाम बातों को बड़े ही सहज, सरल शब्दों में, हिन्दी सिनेमा की तमाम खूबियों (इन्हें आप मसालाभी कह सकते हैं) के साथ इस तरह से दिखाया जाए कि इसे बच्चे भी आसानी से समझ सकें। इस फिल्म को बनाने वालों ने यही दूसरे वाला तरीका चुना है।