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Thursday, 12 August 2021

रिव्यू-तय ढर्रे पर चलता ‘शेरशाह’

1999 में हुई कारगिल की लड़ाई में भारत ने क्या खोया, क्या पाया और किस कीमत पर पाया, यह हम सब जानते हैं। उस युद्ध में जान लड़ाने और जान गंवाने वाले वीरों की कहानियों को सिनेमा में भी दिखाया गया जिनमें से एकएल..सी. कारगिलही अब तक सबसे प्रभावी कही जा सकती है। करण जौहर के बैनर से अमेज़न प्राइम पर आई यह फिल्मशेरशाहभी उससे ऊपर नहीं उठ पाई है। दरअसल वॉर-हीरोज़ की कहानियों का एक तय ढर्रा बना दिया गया है। उनका बचपन, रोमांस, सेना में जाने की ललक और सेना में रह कर दिखाए गए शौर्य के इर्द-गिर्द ही ये कहानियां घूमती हैं। यह फिल्म भी वैसी ही है।

Thursday, 26 December 2019

रिव्यू-मुबारक हो, ‘गुड न्यूज़’ है

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
वरुण बत्रा-दीप्ति बत्रा। पति-पत्नी। बरसों की कोशिश के बाद भी ये दोनों मां-बाप नहीं बन पा रहे थे तो ये लोग पहुंचे डॉ. जोशी के आई.वी.एफ. क्लिनिक में ताकि कृत्रिम गर्भाधान करवा सकें। लेकिन एक गड़बड़ हो गई। वहां चंडीगढ़ से हनी बत्रा-मोनिका बत्रा भी इसी काम से आए हुए थे और क्लिनिक वालों की गलती से वरुण बत्रा के स्पर्म मोनिका की कोख में और हनी बत्रा के दीप्ति की कोख में जा पहुंचे। अब क्या किया जाए?

Saturday, 22 June 2019

रिव्यू-‘कबीर सिंह’-थोथा चना बाजे घना

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
कहानी-एक ही कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के-लड़की में प्यार हो गया। लड़की के बाप को इनका रिश्ता पसंद नहीं। लड़की की शादी कहीं और करवा दी गई। लड़के ने खुद को शराब में डुबो लिया। फिर कुछ हुआ और लड़का सुधर गया।

देखा जाए तो कबीर सिंहकी कहानी बस इतनी ही है। लेकिन इस कहानी के चारों तरफ बहुत कुछ लपेटा गया है। इसके किरदारों के चारों तरफ भी कुछ आवरण हैं जो इसे बीते कुछ सालों में आई फिल्मों से हट करबनाते हैं। लेकिन यह हट करक्या सचमुच घिसी-पिटी लीक को तोड़ता है या फिर सिर्फ हटनेके लिए हटा गया है ताकि लोगों को इस झांसे में लेकर अपना माल बेचा जा सके कि देखिए, यह हट करवाला माल है?