बॉबी (कंगना रानौत) अकेली रहती है। बचपन के एक हादसे के चलते वह थोड़ी हटेली किस्म की है। फिल्मों की डबिंग करती है और खुद को उन किरदारों जैसा समझ कर उन जैसे गैटअप में तस्वीरें भी खिंचवाती है। अपने घर में किराए पर रहने आए केशव और रीमा की ज़िंदगी में दखल देती है। एक हादसे में रीमा मर जाती है। बॉबी कहती है कि उसके पति केशव ने ही उसे मारा है जबकि हालात बॉबी की तरफ इशारा करते हैं। सच क्या है? दो साल बाद वह अपनी कज़िन मेघा के पास लंदन जाती है तो पाती है कि केशव अब मेघा का पति है। बॉबी के वहां पहुंचते ही कुछ हादसे होने लगते हैं। कौन है इसके पीछे, बॉबी, केशव या कोई और...?
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Saturday, 27 July 2019
रिव्यू-हटेली फिल्म है ‘जजमैंटल है क्या’
बॉबी (कंगना रानौत) अकेली रहती है। बचपन के एक हादसे के चलते वह थोड़ी हटेली किस्म की है। फिल्मों की डबिंग करती है और खुद को उन किरदारों जैसा समझ कर उन जैसे गैटअप में तस्वीरें भी खिंचवाती है। अपने घर में किराए पर रहने आए केशव और रीमा की ज़िंदगी में दखल देती है। एक हादसे में रीमा मर जाती है। बॉबी कहती है कि उसके पति केशव ने ही उसे मारा है जबकि हालात बॉबी की तरफ इशारा करते हैं। सच क्या है? दो साल बाद वह अपनी कज़िन मेघा के पास लंदन जाती है तो पाती है कि केशव अब मेघा का पति है। बॉबी के वहां पहुंचते ही कुछ हादसे होने लगते हैं। कौन है इसके पीछे, बॉबी, केशव या कोई और...?Saturday, 8 December 2018
रिव्यू-‘केदारनाथ’-उफ्फ ये ‘शेखुलर’ मोहब्बत
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अगर आपको पता चले कि
2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ में आई उस प्रलयकारी बाढ़ के पीछे एक बड़ा कारण यह भी था कि उस रात मोहब्बत के दुश्मनों ने सच्चा प्यार करने वाले एक जोड़े को अलग कर दिया था, तो कैसा लगेगा? बात फिल्मी है लेकिन अगर ‘कायदे से’ कही जाए तो आपके भीतर छुपे प्रेमी-मन को झंझोड़ सकती है, भावुक कर सकती है कि उस रात उनके बिछड़ने पर बादल भी कुछ इस तरह रोए थे कि हज़ारों को लील गए थे। लेकिन ‘कायदे से’ कही जाए तब न! इस फिल्म में और सब कुछ है, वो ‘कायदा’, वो ‘सलीका’ ही नहीं है जो किसी कहानी को आपके दिल की गहराइयों तक कुछ इस तरह से ले जाता है कि आप उस के साथ बहने लगते हैं।
अगर आपको पता चले कि 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ में आई उस प्रलयकारी बाढ़ के पीछे एक बड़ा कारण यह भी था कि उस रात मोहब्बत के दुश्मनों ने सच्चा प्यार करने वाले एक जोड़े को अलग कर दिया था, तो कैसा लगेगा? बात फिल्मी है लेकिन अगर ‘कायदे से’ कही जाए तो आपके भीतर छुपे प्रेमी-मन को झंझोड़ सकती है, भावुक कर सकती है कि उस रात उनके बिछड़ने पर बादल भी कुछ इस तरह रोए थे कि हज़ारों को लील गए थे। लेकिन ‘कायदे से’ कही जाए तब न! इस फिल्म में और सब कुछ है, वो ‘कायदा’, वो ‘सलीका’ ही नहीं है जो किसी कहानी को आपके दिल की गहराइयों तक कुछ इस तरह से ले जाता है कि आप उस के साथ बहने लगते हैं।
Friday, 14 September 2018
रिव्यू-‘प्यार’ और ‘फ्यार’ के बीच झूलती ‘मनमर्ज़ियां’
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
छोटे शहर की बोल्ड-बिंदास लड़की। अपने बॉय-फ्रैंड के साथ मौज-मज़े करती लड़की। दुनिया भर से पंगा लेती, भिड़ती लड़की। विदेश से शादी करने आया एक सीधा लड़का। आते ही उसे भा गई यह लड़की। उसकी हकीकत जान कर भी उससे शादी करने को तुला लड़का। (‘तनु वैड्स मनु’
याद आ रही है...?)
मर्ज़ी न होते हुए भी लड़की ने कर ली इस सीधे लड़के से शादी। लड़की अब भी बगावती तेवर अपनाए हुए है और लड़का उसका दिल जीतने में लगा है। यहां तक कि लड़की की खुशी के लिए वह उसे छोड़ने को भी तैयार हो जाता है। (‘हम दिल दे चुके सनम’
याद आ रही है...?)
इस कहानी को बनाया है अनुराग कश्यप ने जो इससे पहले भी ‘देव डी’
में एक प्रेम-त्रिकोण दिखा चुके हैं। तो जनाब, कुल मिला कर मामला यह कि कहानी है ‘हम दिल दे चुके सनम’
वाली,
सैटअप है ‘तनु वैड्स मनु’
वाला और ट्रीटमैंट है ‘देव डी’
वाला। कुछ इस तरह से की हैं अनुराग ने मनमर्ज़ियां। अब की हैं,
तो की हैं।
छोटे शहर की बोल्ड-बिंदास लड़की। अपने बॉय-फ्रैंड के साथ मौज-मज़े करती लड़की। दुनिया भर से पंगा लेती, भिड़ती लड़की। विदेश से शादी करने आया एक सीधा लड़का। आते ही उसे भा गई यह लड़की। उसकी हकीकत जान कर भी उससे शादी करने को तुला लड़का। (‘तनु वैड्स मनु’
याद आ रही है...?)
मर्ज़ी न होते हुए भी लड़की ने कर ली इस सीधे लड़के से शादी। लड़की अब भी बगावती तेवर अपनाए हुए है और लड़का उसका दिल जीतने में लगा है। यहां तक कि लड़की की खुशी के लिए वह उसे छोड़ने को भी तैयार हो जाता है। (‘हम दिल दे चुके सनम’
याद आ रही है...?)
इस कहानी को बनाया है अनुराग कश्यप ने जो इससे पहले भी ‘देव डी’
में एक प्रेम-त्रिकोण दिखा चुके हैं। तो जनाब, कुल मिला कर मामला यह कि कहानी है ‘हम दिल दे चुके सनम’
वाली,
सैटअप है ‘तनु वैड्स मनु’
वाला और ट्रीटमैंट है ‘देव डी’
वाला। कुछ इस तरह से की हैं अनुराग ने मनमर्ज़ियां। अब की हैं,
तो की हैं।
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