Showing posts with label sara ali khan. Show all posts
Showing posts with label sara ali khan. Show all posts

Friday, 25 December 2020

रिव्यू-एंटरटेमैंट का बोझ नहीं उठा पाई ‘कुली नं. 1’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पहला सीन-गोआ के एक रईस ईसाई बिज़नेसमैन जैफ्री रोज़ारियो की बेटी के लिए एक हिन्दू पंडित
रिश्ता लेकर आया हुआ है। (आप चाहें तो सिर्फ इस बेतुके सीन को देखने के बाद ही इस फिल्म को बंद करके किचन में पत्नी की या होमवर्क में बच्चों की मदद करने जैसा कोई सार्थक काम कर सकते हैं। इस रिव्यू को भी आगे न पढ़ने का फैसला आप यहीं
, इसी वक्त ले सकते हैं। नहीं...? चलिए, आपकी मर्ज़ी, हमें क्या, पढ़िए...) हां, तो जैफ्री उस पंडित की बेइज़्ज़ती करता है और पंडित मुंबई सैंट्रल रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करने वाले राजू को महा-रईस बता कर उसका रिश्ता जैफ्री की बेटी से करवा देता है। ज़ाहिर है इस कहानी में कई उलझने होंगी जो अंत तक सुलझ ही जाएंगी।

Saturday, 15 February 2020

रिव्यू-उलझ कर रह गया है ‘लव आज कल’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इस फिल्म के लेखक-निर्देशक इम्तियाज़ अली खुद यह बात मान चुके हैं कि इसे बनाने का आइडिया उन्हें दोस्तों की एक बैठक में आया कि 2009 में आई उनकी फिल्म लव आज कलके किरदार अगर आज के समय में होते तो कैसे बर्ताव करते। आगे की कहानी यह है कि दोस्तों की उस बैठक में एक तो होंगे निर्माता दिनेश विजन जिन्होंने पिछली वाली लव आज कलसे खूब नोट छापे थे सो इस फिल्म पर पैसा लगाने से नहीं हिचके होंगे। दूसरे होंगे सैफ अली खान जिन्होंने कहा होगा-यार, मेरी बेटी को ले ले इस बार। वो बेचारी भी कोई कायदे की फिल्म कर लेगी जिसे देख कर लोग कहेंगे-वाओ...! पर क्या ऐसा हो पाया?

Saturday, 29 December 2018

रिव्यू-‘सिंबा’-माईंड ईच ब्लोईंग पिक्चर

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अगर खबरों में छोटी-सी बच्ची से लेकर बूढ़ी औरतों तक से हो रहे रेप की खबरों को पढ़-सुन कर आपके मन में आता है ऐसा काम करने वालों को तो बीच बाजार में ठोक देना चाहिए या इनका वोही काट देना चाहिए। अगर फलते-फूलते अपराधियों और पुलिस के गठजोड़ की खबरें आपको बेचैन करती हैं और आपका मन करता है कि कोई आए और इस सारे सिस्टम को अपनी पॉवर से बदल कर रख दे तो लीजिए, रोहित शैट्टी आपके लिए सिंबालेकर आए हैं। सिंबा मंझे पोलीस इनिसपैक्टर संग्राम भालेराव। बोले तो-ऐसा फटाका जो बड़ा धमाका करेगा, मगर इंटरवल के बाद।

Saturday, 8 December 2018

रिव्यू-‘केदारनाथ’-उफ्फ ये ‘शेखुलर’ मोहब्बत

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
अगर आपको पता चले कि 
2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ में आई उस प्रलयकारी बाढ़ के पीछे एक बड़ा कारण यह भी था कि उस रात मोहब्बत के दुश्मनों ने सच्चा प्यार करने वाले एक जोड़े को अलग कर दिया था, तो कैसा लगेगा? बात फिल्मी है लेकिन अगर कायदे सेकही जाए तो आपके भीतर छुपे प्रेमी-मन को झंझोड़ सकती है, भावुक कर सकती है कि उस रात उनके बिछड़ने पर बादल भी कुछ इस तरह रोए थे कि हज़ारों को लील गए थे। लेकिन कायदे सेकही जाए तब ! इस फिल्म में और सब कुछ है, वो कायदा’, वो सलीकाही नहीं है जो किसी कहानी को आपके दिल की गहराइयों तक कुछ इस तरह से ले जाता है कि आप उस के साथ बहने लगते हैं।