अमेरिका से आया एक जोड़ा राजस्थान की लड़की मिमी को 20 लाख रुपए में सरोगेट मदर बनने पर राज़ी करता है। यानी अब मिमी इस जोड़े के बच्चे को 9 महीने तक अपनी कोख में रखेगी और बच्चा पैदा करके उन्हें सौंप देगी। लेकिन अचानक यह जोड़ा लापता हो जाता है। अब मिमी अपने घरवालों को, समाज को क्या जवाब देगी...? बच्चा हुआ, मिमी उसे पालने लगी। कुछ साल बाद वे गोरे आ धमके और उससे अपना बच्चा मांगने लगे। अब मिमी क्या करेगी...?
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Friday, 30 July 2021
रिव्यू-मंज़िल तक पहुंचाती ‘मिमी’
अमेरिका से आया एक जोड़ा राजस्थान की लड़की मिमी को 20 लाख रुपए में सरोगेट मदर बनने पर राज़ी करता है। यानी अब मिमी इस जोड़े के बच्चे को 9 महीने तक अपनी कोख में रखेगी और बच्चा पैदा करके उन्हें सौंप देगी। लेकिन अचानक यह जोड़ा लापता हो जाता है। अब मिमी अपने घरवालों को, समाज को क्या जवाब देगी...? बच्चा हुआ, मिमी उसे पालने लगी। कुछ साल बाद वे गोरे आ धमके और उससे अपना बच्चा मांगने लगे। अब मिमी क्या करेगी...?
Friday, 16 July 2021
रिव्यू-प्याली में ‘तूफान’
छिछोरे नायक को नायिका की बात दिल पर लगती है तो वह पहलवानी करने लगता है। दोनों शादी भी कर लेते हैं। फिर कुछ ऐसा होता है कि वह पहलवानी छोड़ देता है। कुछ अर्से बाद वह लौटता है तो किसी और को नहीं बल्कि अपने-आप को जीतने के लिए।
ओह, सॉरी! यह तो सलमान खान वाली ‘सुल्तान’ की कहानी सुना दी। अब फरहान अख्तर वाली ‘तूफान’ की कहानी सुनिए।
Saturday, 18 January 2020
रिव्यू-थमी-थमी फिल्म है ‘जय मम्मी दी’
-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
स्कूल-कॉलेज के ज़माने की दो सहेलियां किसी बात पर ऐसी बिगड़ीं कि दुश्मन बन गईं। लेकिन शादी के बाद भी रहती एक-दूसरे के पड़ोस में हैं। यहां से शिफ्ट होकर दोनों नए घर में गईं तो वो घर भी चिपके हुए निकले। वाह रे राईटर साहब, आपकी समझदानी को म्यूजियम में रखूं। खैर...! किस बात पर ये दोनों ऐसी पक्की दुश्मन बनी थीं, यह पूरी फिल्म में सामने नहीं आता। और जब अंत में सामने आता है तो दिल ढूंढता है चुल्लू भर पानी, कि मुंह धो कर नींद भगा लें। दिक्कत यह है कि इन दोनों के बेटे-बेटी को एक-दूजे से प्यार हो जाता है। क्यों और कैसे? यह राईटर साहब नहीं बताना चाहते, उनकी मर्ज़ी। अब इन दोनों ने आपस में करनी है शादी लेकिन अपनी-अपनी मम्मियों के आगे इनकी ही नहीं इनके बापों की भी नहीं चलती। इनकी मम्मियों की तो... जय।
स्कूल-कॉलेज के ज़माने की दो सहेलियां किसी बात पर ऐसी बिगड़ीं कि दुश्मन बन गईं। लेकिन शादी के बाद भी रहती एक-दूसरे के पड़ोस में हैं। यहां से शिफ्ट होकर दोनों नए घर में गईं तो वो घर भी चिपके हुए निकले। वाह रे राईटर साहब, आपकी समझदानी को म्यूजियम में रखूं। खैर...! किस बात पर ये दोनों ऐसी पक्की दुश्मन बनी थीं, यह पूरी फिल्म में सामने नहीं आता। और जब अंत में सामने आता है तो दिल ढूंढता है चुल्लू भर पानी, कि मुंह धो कर नींद भगा लें। दिक्कत यह है कि इन दोनों के बेटे-बेटी को एक-दूजे से प्यार हो जाता है। क्यों और कैसे? यह राईटर साहब नहीं बताना चाहते, उनकी मर्ज़ी। अब इन दोनों ने आपस में करनी है शादी लेकिन अपनी-अपनी मम्मियों के आगे इनकी ही नहीं इनके बापों की भी नहीं चलती। इनकी मम्मियों की तो... जय।
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