Saturday, 27 July 2019

रिव्यू-हटेली फिल्म है ‘जजमैंटल है क्या’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बॉबी (कंगना रानौत) अकेली रहती है। बचपन के एक हादसे के चलते वह थोड़ी हटेली किस्म की है। फिल्मों  की डबिंग करती है और खुद को उन किरदारों जैसा समझ कर उन जैसे गैटअप में तस्वीरें भी खिंचवाती है। अपने घर में किराए पर रहने आए केशव और रीमा की ज़िंदगी में दखल देती है। एक हादसे में रीमा मर जाती है। बॉबी कहती है कि उसके पति केशव ने ही उसे मारा है जबकि हालात बॉबी की तरफ इशारा करते हैं। सच क्या है? दो साल बाद वह अपनी कज़िन मेघा के पास लंदन जाती है तो पाती है कि केशव अब मेघा का पति है। बॉबी के वहां पहुंचते ही कुछ हादसे होने लगते हैं। कौन है इसके पीछे, बॉबी, केशव या कोई और...?

Sunday, 21 July 2019

रिव्यू-आज में जीने का आनंद देती ‘अरदास करां’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पंजाबी फिल्मों के मस्ती-मज़ाक और हो-हल्ले के बीच अरदास करांकिसी सुहानी हवा के खुशबूदार झोंके सरीखी लगती है। पंजाबी गायिकी के स्टार गिप्पी ग्रेवाल ने एक्टिंग के मैदान में उतरने के बाद 2016 में अरदाससे निर्देशन की कमान संभाली थी जिसे काफी ज़्यादा पसंद किया गया था। अब इस फिल्म में वह एक बार फिर निर्देशक और एक्टर के तौर पर सामने आए हैं।

ब्रिटेन में रह रहे पंजाबी परिवारों में रहे और चुके जेनरेशन गैप और तालमेल की कमियों की बात कहती इस फिल्म की कहानी साधारण है। अपने-अपने बच्चों से तंग आकर कुछ दिन के लिए दुनिया घूमने निकल पड़े तीन बुज़ुर्गों को उनका ड्राईवर मैजिक (गुरप्रीत घुग्गी) ज़िंदगी को खुल कर जीने के ऐसे-ऐसे मंत्र बताता है कि इन तीनों का घर-परिवार और ज़िंदगी पर विश्वास लौटने के साथ-साथ और पुख्ता हो उठता है। यह अलग बात है कि इन्हें जीना सिखा कर मैजिक खुद मर जाता है।

Thursday, 11 July 2019

रिव्यू-रियल हीरो की फिल्मी दास्तान दिखाती ‘सुपर 30’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक मेधावी छात्र गरीबी के कारण पढ़ने के लिए विदेश जा सका लेकिन शहर के एक महंगे कोचिंग सैंटर का स्टार टीचर बन कर तगड़ी कमाई करने लगा। एक दिन अपनी ही तरह के एक मेधावी मगर गरीब छात्र को देख कर उसकी आंखें खुलीं और उसने 30 गरीब मेधावी छात्रों को चुन कर उन्हें इंजीनियनिंग की प्रवेश-परीक्षा की तैयारी करवानी शुरू कर दी, अपने खर्चे पर। इस तरह से साल-दर-साल यह टीचर ऐसे 30 बच्चों के खाने-पीने, रहने-पढ़ने का खर्चा उठाता रहा और उनमें से ज्यादातर को आई.आई.टी. जैसे संस्थानों में पहुंचाता रहा। इस टीचर के रास्ते में ढेरों बाधाएं भी आईं लेकिन इसने हार मानी और एक दिन पूरी दुनिया ने इसे इज़्ज़त दी।

Saturday, 6 July 2019

ओल्ड रिव्यू-सलमान का धोबी पछाड़-‘सुल्तान’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सामने पर्दे पर सलमान खान हों तो आप फिल्म में क्या देखना चाहेंगे?
अगर आप सलमान खान के फैन हैं तो इस सवाल का सिर्फ एक ही जवाब हो सकता है-सलमान खान।
तो बस खुश हो जाइए, यह फिल्म आपके लिए ही है।

अब रही बात उनकी जो किसी फिल्म को उस फिल्म के लिए देखते हैं और आंख मूंद कर यूं ही किसी के फैन नहीं हो जाते। तो सुनिए, यह खेल पर आधारित फिल्म नहीं है। हां इसमें कुश्ती है, फिल्म के नायक और नायिका पहलवान हैं और कुश्ती करना, जीतना, मैडल लाना ही उनका सपना है। बावजूद इसके इस फिल्म को एक स्पोर्ट्स-फिल्म नहीं कह सकते। मुख्यतः यह एक लव-स्टोरी है जिसमें छिछोरा नायक पहलवान नायिका को प्रभावित करने के फेर में पहलवानी करने लगता है और फिर उसके हाथों बेइज्जत होकर इसी काम को सीरियसली ले लेता है। फिर कुछ ऐसा होता है कि वह पहलवानी छोड़ देता है। इसके बाद वह लौटता है तो किसी और को नहीं बल्कि अपने-आप को जीतने के लिए।