Thursday, 20 August 2020

अच्छे सिनेमा की मिसाल होगी ‘मी रक़्सम’-राकेश चतुर्वेदी

-दीपक दुआ...
दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से प्रशिक्षित प्रसिद्ध अभिनेता-निर्देशक राकेश चतुर्वेदी रंगमंच के अलावा फिल्मों में भी भरपूर सक्रिय रहते हैं। बतौर निर्देशक वह नसीरुद्दीन शाह को लेकरबोलो रामऔर मनोज पाहवा के साथभल्ला एट हल्ला डॉट कॉमनिर्देशित कर चुके हैं। बतौर अभिनेतापरज़ानिया, ‘यूं होता तो क्या होता, ‘पैडमैनआदि के बाद अक्षय कुमार कीकेसरीमें मुल्ला सैदुल्लाह के किरदार से काफी चर्चित हुए राकेश अब मशहूर सिनेमैटोग्राफर बाबा आज़मी के निर्देशन में बनी पहली फिल्ममी रक़्सममें दिखेंगे जो कि .टी.टी. प्लेटफॉर्म ज़ी-5 पर रही है। प्रस्तुत है उनसे हुई चंद बातें-

Tuesday, 18 August 2020

रिव्यू-उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी ‘खुदा हाफिज़’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
विद्युत जामवाल किसी फिल्म के हीरो हों तो उसमें कमांडो स्टाइल का एक्शन ही होगा। इसे कोई सीधी-सी फिल्म में क्यों नहीं लेता? लीजिए, ले लिया इसेसीधी-सीफिल्म में। दे दिया इसेसीधा-सारोल। पर क्या यह बंदा इस फिल्म और अपने रोल के साथ न्याय कर पाया? और उससे भी ज़रूरी बात, कि क्या यह फिल्म इस बंदे के साथ न्याय कर पाई? आइए, पहले कहानी का मुआइना कर लें।

Saturday, 15 August 2020

रिव्यू-मनोरंजन की दौलत है इस ‘लूटकेस’ में

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
एक नेता ने अपने पाले हुए गुंडे के हाथों दूसरे नेता को दस करोड़ रुपए से भरा सूटकेस भेजा। उस सूटकेस में एक फाइल भी थी। रास्ते में दूसरे गैंग ने हमला कर दिया और सूटकेस गया छूट। देर रात की नौकरी से लौटते एक आम आदमी को वह मिला और वह उसे घर ले आया। अब नेता, उसके गुंडे, उसका पाला हुआ पुलिस वाला, दूसरे गैंग्स्टर के गुंडे, सब उस आदमी के पीछे पड़े हैं। और वह आदमी है कि उस पैसे के बारे में अपने बीवी-बच्चों को भी नहीं बता सकता।

Sunday, 9 August 2020

यात्रा-जम्मू और चिनाब किनारे अखनूर (भाग-10-अंतिम किस्त)

-दीपक दुआ...
पिछले आलेख में आपने पढ़ा कि पटनीटॉप पहुंच कर हमने कुदरती नज़ारे तो बहुत देखे लेकिन बारिश के चलते हम ज़्यादा घूम-फिर नहीं पाए और बिजली से गर्म होने वाले कंबलों में दुबके रहे (पिछला आलेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)। अगली सुबह मौसम बिल्कुल साफ था और हमारा मन था कि नाश्ते के बाद नत्था टॉप के लिए निकल जाएं। लेकिन वहां नया कुछ मिलना नहीं था और यहां गुनगुनी धूप में बैठ कर सामने बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों को निहारना ज़्यादा सुख दे रहा था। सो, यहां कुछ और वक्त बिताने के बाद हमने जम्मू का रास्ता पकड़ लिया। रास्ते में एक बार फिर से कुद में ‘प्रेम दी हट्टी’ से पतीसा पैक करवाया और कुछ ही घंटे में हम लोग जम्मू शहर में ‘जामवंत गुफा’ के दर्शन के लिए जा पहुंचे। मान्यता है कि भगवान राम के सहयोगी ऋक्षपति (रीछ) जामवंत ने यहां तपस्या की थी। यहां के बाद हमारा अगला पड़ाव था जम्मू रेलवे स्टेशन के बिल्कुल करीब बना हुआ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का होटल ‘वैष्णवी धाम’ जहां मैंने दो महीने पहले ही एक सुइट बुक करवा लिया था।

रिव्यू-चरमराते रिश्तों का सस्पैंस सुलझाती ‘रात अकेली है’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
शहर के प्रतिष्ठित रईस ठाकुर रघुबीर सिंह का कत्ल हुआ है। उन्हीं के घर में, उन्हीं की बंदूक से, उन्हीं के परिवार के बीच। उनकी दूसरी शादी की रात को। ज़ाहिर है कि कातिल कोई घर का ही आदमी है। या फिर कोई औरत...? वो औरत, जो कल तक उनकी रखैल थी और आज शादी के बाद ठकुराईन? कत्ल की तफ्तीश इंस्पैक्टर जटिल यादव के ज़िम्मे है। नाम का जटिल लेकिन सुलझी हुई सोच वाला एक ऐसा इंसान जो सच को कहीं से भी खोद कर निकालने की हिम्मत और कुव्वत रखता है। पर क्या जटिल सुलझा पाएगा इस केस को, जिसके धागे खुलेंगे तो कइयों की नंगई सामने आएगी?