Saturday, 14 December 2019

रिव्यू-कड़वे हालात दिखाती है ‘मर्दानी 2’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
आपके दोस्त का एक्सीडैंट हो गया है। आप कहें तो मैं आपको हॉस्पिटल तक छोड़ दूं...? और फिर मिलती है उस लड़की की लाश-बुरी तरह से मसली हुई, कुचली हुई।

अपने मौजूदा समाज की यह कड़वी और स्याह तस्वीर है जिसमें दूसरों पर भरोसा करने वाली लड़कियां का सिर्फ भरोसा ही नहीं टूटता, उनका ज़मीर, इज़्ज़त, शरीर, वजूद, सब कुचला जाता है उस मर्द जातद्वारा जिसे गुरूर है अपने श्रेष्ठ होने पर। जिसे यकीन है कि वह औरतों से कहीं बेहतर है, खासतौर से उन औरतों से जिनके पास अपना दिमाग है, अपनी आवाज़ है, जो स्मार्ट हैं, या होना चाहती हैं। ऐसी औरतें, चाहें घरों में हों, दफ्तरों में, सड़कों पर या सोसायटी में, ये श्रेष्ठमर्द मौका मिलते ही उसे दबा देना चाहते हैं, चुप करा देना चाहते हैं, खत्म कर देना चाहते हैं।

Sunday, 8 December 2019

रिव्यू-पति पत्नी और मसालेदार वो

रिव्यू-पति पत्नी और मसालेदार वो (Featured in IMDb Critics Reviews)
-दीपक दुआ...
1978 में आई बी.आर. चोपड़ा जैसे दिग्गज निर्देशक की फिल्म पति पत्नी और वोमें पति संजीव कुमार अपने ऑफिस की जवां सेक्रेटरी रंजीता से अपनी पत्नी विद्या सिन्हा की बीमारी का बहाना करके अफेयर चलाता है। उस फिल्म के इस रीमेक में कानपुर में सरकारी नौकरी कर रहा इंजीनियर कार्तिक आर्यन अपनी पत्नी भूमि पेढनेकर के किसी और के साथ अफेयर होने की बात कह कर अनन्या पांडेय की नजदीकियां हासिल करता है। एक कामयाब फिल्म का रीमेक बने और आज के दर्शकों की मसालेदार मनोरंजन पाने की चाहत को ध्यान में रख कर बने तो वह कामयाब होगी ही, क्लासिक भले ही न हो पाए। वैसे भी अब क्लासिक फिल्में किसे चाहिएं? जब दर्शक जंक-फूड से खुश हों तो फिल्म वाले भी क्यों ज़ोर लगाएं।

Friday, 6 December 2019

रिव्यू-ज़ंग लगे हथियारों वाली ‘पानीपत’ की जंग

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
इतिहास के पन्नों से निकली किसी कहानी को फिल्मी पर्दे पर उतारना आसान नहीं होता। जोधा अकबरमें इस काम को साध चुके आशुतोष गोवारीकर खेलें हम जी जान सेऔर मोहेंजो दारोमें नाकामी झेलने के बाद अगर फिर से इतिहास के समंदर में कूदे हैं तो उनके साहस की तारीफ होनी चाहिए। भले ही इस बार भी उनके हाथ में सच्चा मोती लगा हो लेकिन उन्होंने निराश भी नहीं किया है। सच तो यह है कि इस फिल्म को फिल्म की बजाय इतिहास के किसी अध्याय की तरह देखा जाए तो यह उस दौर के माहौल की तस्वीर उकेर पाने में कामयाब दिखती है।

Thursday, 5 December 2019

रिव्यू-हैरान करती है ‘यह साली आशिकी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
होटल मैनेजमैंट के कॉलेज में लड़का-लड़की मिलते हैं, उनमें दोस्ती होती है और फिर मोहब्बत। दर्शक के मन में सवाल उठता है कि एक रोमांटिक कहानी पर यह साली आशिकीजैसा निगेटिव नाम क्यां? लेकिन जल्दी ही कहानी की परतें खुलने लगती हैं और पता चलता है कि जो दिख रहा है, उसके पीछे की कहानी कुछ और है। इंटरवल आते-आते यह रोमांटिक से थ्रिलर फिल्म में तब्दील हो जाती है और इंटरवल के बाद एक रिवेंज ड्रामा। आखिर है क्या इसमें?

Sunday, 1 December 2019

इफ्फी-सुनहरे बरस में फिल्मोत्सव की धूम

-दीपक दुआ...
1952 में शुरू हुए भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) ने इस बरस अपने 50वें संस्करण में कदम
रखा। इस सुनहरे मौके पर इफ्फी की रंगत कुछ अलग ही रही। 20 नवंबर की शाम करण जौहर के संचालन और अमिताभ बच्चन रजनीकांत जैसे दो महानायकों की उपस्थिति में इस समारोह की रंगारंग शुरूआत हुई। देश-विदेश की ढेरों उत्कृष्ट फिल्मों के प्रदर्शन के साथ-साथ सिनेमा से जुड़ी बहुतेरी गतिविधियां से यह उत्सव लबरेज रहा।
बदला रंग बदला रूप
1952 से लेकर अब तक इफ्फी के रूप-रंग में कई किस्म के बदलाव हुए हैं। पहले यह महोत्सव घुमंतू था। हर साल देश के अलग-अलग शहरों में होता था। लेकिन 2004 से यह गोआ में जाकर जम चुका है और अपनी एक अलग पहचान भी हासिल कर चुका है। गोआ में भी यह पहले 23 नवंबर से 3 दिसंबर तक होता था। फिर यह 20 से 30 नवंबर तक होने लगा और 2016 से इसे 20 से 28 नवंबर तक आयोजित किया जाने लगा।