Friday, 5 May 2017

रिव्यू-ठंडे गोश्त जैसी ठंडी फिल्म है ‘मंटोस्तान’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
हो मंटो की कहानियों पर फिल्म...! चलो-चलो सब लोग चलते हैं। देखते हुए खामोश रहना और हां, बाहर निकलने के बाद तारीफ जरूर करना। भई, आखिर मंटो जैसे लेखक की कहानियों पर बनी फिल्म है और खुद को बुद्धिजीवी भी तो दिखाना है न।

बतौर निर्देशक अब तक की अपनी तीनों फिल्मों-इम्पेशेंट विवेक’, ‘देख रे देखऔर आइडेंटिटी कार्डसे राहत काजमी बता चुके हैं कि फिल्म बनाने का उनका इरादा भले ही हर बार नेक होता हो लेकिन एक कसी हुई और दिलचस्प पटकथा रच पाने के मामले में वह काफी कमजोर हैं। इस फिल्म में उन्होंने सआदत हसन मंटो जैसे कालजयी लेखक की चार कहानियों-खोल दो’, ‘ठंडा गोश्त’, ‘एसाइनमैंटऔर आखिरी सैल्यूटको एक साथ लेकर जो स्क्रिप्ट तैयार की है वह एकदम पैदल, लचर और उबाऊ है। भारत-पाक बंटवारे की पृष्ठभूमि पर लिखी गईं मंटो की ये कहानियां अपने-आप में इतनी ज्यादा सशक्त हैं कि इन्हें ज्यों का त्यों भी दिखा दिया जाता तो ये ज्यादा असर करती। लेकिन अपने ओढ़े हुए बुद्धिजीवीपने के चलते अक्सर फिल्म वाले इन कहानियों से ऐसी छेड़छाड़ कर बैठते हैं कि इनका असर कम हो जाता है। ऐसे में रघुवीर यादव या वीरेंद्र सक्सेना की एक्टिंग भी फिर किसी काम की नहीं रह जाती। हल्की प्रोडक्शन वैल्यू के चलते सब कुछ काफी बनावटी-सा लगता है, सो अलग।
इन कहानियों को एक-एक कर दिखाने की बजाय जिस तरह से निर्देशक ने इन्हें एक-दूसरे में गुत्थमगुत्था किया है उससे तो ये लगभग बेजान ही हो गई हैं। ठीक मंटो की ही कहानी ठंडा गोश्तकी उस लाश की तरह जिसके साथ ईश्वर सिंह पत्ते फेंट रहा था।
अपनी रेटिंग-एक स्टार
(
दीपक दुआ फिल्म समीक्षक पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज़ से घुमक्कड़। अपने ब्लॉग सिनेयात्रा डॉट कॉम (www.cineyatra.com) के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक फिल्म क्रिटिक्स गिल्डके सदस्य हैं और रेडियो टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)

Monday, 1 May 2017

रंगारंग शो में बंटे कलर्स के गोल्डन पेटल अवार्ड


-दीपक दुआ...

वह शाम सचमुच रंगीनियों से भरपूर थी। मुंबई के सरदार वल्लभभाई पटेल इनडोर स्टेडियम के रेड कारपेट पर बड़े और छोटे पर्दे की हस्तियों के कदम रखते ही कैमरों की फ्लैश लाइटें यूं चमकने लगती थीं जैसे आसमानी बिजलियां कड़क रही हों। करण जौहर, फराह खान, मनीष पॉल, दिलजीत दोसांझ, मलाइका अरोड़ा खान, भारती, जैक्लिन फर्नांडीज, कामिया पंजाबी, मौनी रॉय, मोहन कपूर, अदा खान, सुधा चंद्रन, रश्मि देसाई, अयूब खान, सूरज बड़जात्या, गूफी पेंटल, गणेश हेगड़े, जूही परमार, सलिल अंकोला, सिद्धार्थ शुक्ला, शरद मल्होत्रा, प्राची शाह... किस-किस का नाम लें। हर कोई तो था वहां, लग रहा था। दरअसल, यह मौका था 5वें गोल्डन पेटल अवार्ड का जो उस शाम वहां हुआ और बहुत जल्द कलर्स चैनल पर जिसका प्रसारण किया जाएगा।
करण जौहर, फराह खान और मनीष पॉल की एंकरिंग वाले इस शो में कलर्स के कलाकारों ने ढेरों ऐसी रंगारंग परफॉरमेंस दीं जिन्हें देख कर वहां मौजूद हजारों दर्शकों को बेहद आनंद आया। बीच-बीच में करण, मनीष, फराह, भारती वगैरह के चुलबुले मजाक और चुटीली टिप्पणियों ने खूब समां बांधा। देर रात तक चले इस शो में शक्ति-अस्तित्व के अहसास कीने सबसे ज्यादा पांच अवार्ड कब्जाए।