Sunday, 10 January 2021

रिव्यू-फिल्म वालों के दोगलेपन की कहानी है ‘एके वर्सेस एके’

 -दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बरसों पहले ए.के. यानी अनुराग कश्यप ने ए.के. यानी अनिल कपूर को ले कर एक फिल्म एनाउंस की थी जिसका नाम था-ए.के यानी ‘आल्विन कालीचरण’। किन्हीं कारणों से वो फिल्म बन नहीं पाई। इस दौरान अनिल कपूर अनुराग जैसे डार्क फिल्में बनाने वालों से खुद को दूर रखते हुए मनोरंजक फिल्मों के स्टार बने रहे और अनुराग कश्यप अनिल जैसे लोगों को गरियाते हुए अपनी तरह के स्टार बन गए। यह फिल्म इन दोनों के मौजूदा स्टेट्स से शुरू होती है। अनुराग को अनिल से आज भी खुन्नस है। वह उनके साथ काम करना चाहते हैं लेकिन अनिल उन्हें वक्त नहीं दे रहे हैं। एक दिन अनुराग अनिल की बेटी सोनम को किडनैप कर लेते हैं और अनिल को मजबूर करते हैं कि वह कल सुबह से पहले अपनी बेटी को तलाशें और इस पूरी रात में एक कैमरा उन्हें लगातार शूट करता रहेगा। क्या होता है इस एक रात में? कितना सच (या झूठ) छुपा है इन दोनों की इस भिड़ंत में?

Thursday, 7 January 2021

धूमधाम से संपन्न हुआ खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह-2020

-दीपक दुआ...
देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले किस्म-किस्म के फिल्म समारोहों में से ज्यादातर बड़े शहरों तक ही सिमटे हुए हैं। कुछ समारोह छोटी जगहों पर हो भी रहे हैं तो उनमें फिल्मी हस्तियों की भागीदारी नहीं होती। ऐसे में ‘खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह’ इस मायने में खास है कि एक तो यह खजुराहो जैसी उस जगह पर होता है जहां कोई थिएटर, कोई ऑडिटोरियम तक नहीं है और इस समारोह के लिए खासतौर से ‘टपरा टॉकीज’ यानी टैंट से बने अस्थाई थिएटर बनाए जाते हैं, वहीं इसमें हर साल बड़ी तादाद में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के नामी कलाकार और निर्देशक न सिर्फ बतौर मेहमान बुलाए जाते हैं बल्कि इस आयोजन की तमाम गतिविधियों में भी ये लोग शिरकत करते हैं। पिछले छह बरस से हर साल दिसंबर के महीने में यह फिल्मोत्सव आयोजित किया जाता है।