एंथोलॉजी यानी लगभग एक ही जैसे विषय पर कही गईं अलग-अलग कहानियों को एक ही फिल्म में पिरोना। हिन्दी सिनेमा वालों ने भी हिम्मत करके गाहे-बगाहे इस शैली को अपनाया है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई यह फिल्म ‘अजीब दास्तान्स’ भी ऐसी ही चार दास्तानों को सामने ला रही है जो कमोबेश एक ही धागे से बंधी हुई हैं लेकिन इनमें आपस में कोई नाता नहीं है। असल में यह चार अलग-अलग निर्देशकों की बनाई चार शॉर्ट-फिल्मों का एक संकलन है जिसे एक ही थाली में रख कर परोसा गया है। हर किसी की अपनी-अपनी पसंद की फिल्म अलग-अलग हो सकती है। मगर आइए,
पहले इनके गुण-दोषों की बात कर लें।
Sunday, 18 April 2021
रिव्यू-कामुकता और क्राइम की अजीब दास्तानें
Friday, 16 April 2021
गोबर करेंगे अजय देवगन...!
-दीपक दुआ...
वैसे तो
बहुत सारे
फिल्मी सितारे
और फिल्मकार
सिनेमा के
नाम पर
पर्दे पर
गोबर ही
करते हैं लेकिन अब
सचमुच बड़े
पर्दे पर
गोबर होगा
जिसे अजय
देवगन, सिद्धार्थ
रॉय कपूर
और सबल
शेखावत लेकर
आएंगे। दरअसल ‘गोबर’
नाम है
उस कॉमेडी
फिल्म का
जिसे अजय
देवगन और
सिद्धार्थ रॉय
कपूर मिल
कर बना
रहे हैं।
प्रसिद्ध विज्ञापन
फिल्ममेकर सबल
शेखावत इस
फिल्म के
डायरेक्टर होंगे।
यह फिल्म
सबल ने
संबित मिश्रा
के साथ
मिल कर
लिखी है।
1990 के दशक के
समय में
भारत के
हिन्दी भाषी
इलाके की
यह व्यंग्यात्मक
कहानी सच्ची
घटनाओं से
प्रेरित बताई
जा रही
है जिसमें
एक पशु-प्रेमी पशु
चिकित्सक को
स्थानीय राजकीय
अस्पताल में
भ्रष्टाचार का
सामना करना
पड़ता है।
यह फिल्म
भ्रष्टाचार के
खिलाफ खड़े
हुए एक
इंसान की
हास्यास्पद बहादुरी
की यात्रा
पर आधारित
कॉमेडी होगी।
Tuesday, 13 April 2021
रिव्यू-‘जोजी’ मज़बूत सही मक़बूल नहीं
शेक्सपियर के रचे ने फिल्मकारों को हमेशा से लुभाया है। खासतौर से उनके ‘मैक्बेथ’ के प्रति तो दुनिया भर के फिल्मकारों में आसक्ति रही है। फिर चाहे वह जापान के अकीरा कुरोसावा की ‘थ्रोन ऑफ ब्लड’ (1957)
हो या विशाल भारद्वाज की ‘मक़बूल’ (2004),
इस नाटक का पर्दे पर किया गया चित्रण हर बार कुछ अलग, कुछ गहरा ही रहा है। लेकिन हाल ही में अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुई मलयालम फिल्म ‘जोजी’ में निर्देशक दिलीश पोथान हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। एक ऐसी दुनिया, कि अगर बताया न जाए तो इसमें ‘मैक्बेथ’ की कहानी को पकड़ पाना मुश्किल हो सकता है। दरअसल दिलीश ने मूल कहानी के सार को लेते हुए उसमें अपने डाले किरदारों, उन किरदारों की विशेषताओं, उनकी पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के ज़रिए अपनी बात कही है।
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